नई दिल्ली: देश का हेल्थ सिस्टम और बेहतर होगा। ऐसा ईकोसिस्टम बनेगा कि मरीजों जल्द से जल्द बेहतर इलाज मिलेगा। इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) ने ई-सुश्रुत@क्लिनिक शुरू करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव भी मौजूद रहीं।
क्या है ई-सुश्रुत@क्लिनिक
ई-सुश्रुत@क्लिनिक सेवा एक सामान्य क्लाउड-आधारित अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) मुहैया कराता है। इसे खास करके ओपीडी क्लीनिकों ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। छोटे और मध्यम स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए डिजाइन की गई है। यह आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) ईकोसिस्टम को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है जिसका उद्देश्य डिजिटल स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के विकास में सहयोग करना है।
ईसुश्रुत@क्लिनिक को बाह्य रोगी प्रबंधन, फार्मेसी व नर्सिंग मॉड्यूल के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है और यह कम प्रति-उपयोगकर्ता लागत पर आवश्यक सुविधाएं प्रदान करता है। यह प्लेटफॉर्म छोटे क्लीनिकों, उप-केंद्रों और मध्यम आकार के अस्पतालों को न्यूनतम तकनीकी खर्च के साथ रोगी रिकॉर्ड, नुस्खे तथा बिलिंग को डिजिटल बनाने में सक्षम बनाता है।
एबीडीएम की कई उपयोगिताएं और विशेषताएं ई-सुश्रुत@क्लिनिक में उपलब्ध होंगी। उदाहरण के लिए स्वास्थ्य सेवा प्रदाता उच्च रक्तचाप और मधुमेह के लिए एम्स क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (सीडीएसएस) सेवा का उपयोग करेंगे, जो सभी एबीडीएम-एकीकृत सॉफ्टवेयर के लिए निःशुल्क प्रदान की जा रही है। यह सीडीएसएस डॉक्टरों को बेहतर निदान और उपचार करने में सहायता करके रोगी देखभाल को बेहतर बनाने में मदद करता है।
डेटा रहेगा सुरक्षित
पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि किफायती सरकार से सहायता प्राप्त एचएमआईएस की मांग लंबे समय से बनी हुई थी। हम सी-डैक के सहयोग से उम्मीद करते हैं कि ई-सुश्रुत@क्लिनिक देशभर में हजारों चिकित्सकों और सुविधा प्रदाताओं को सशक्त बनाएगा। यह उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति करेगा जिससे दक्षता, डेटा सुरक्षा और रोगी संतुष्टि में सुधार होगा। चूंकि ईसुश्रुत@क्लिनिक एबीडीएम-सक्षम है, इसलिए यह एबीडीएम को अपनाने में मदद करेगा।
डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं बढेंगी
सी-डैक, नोएडा के कार्यकारी निदेशक विवेक खनेजा ने कहा कि यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के साथ बेहतरीन साझेदारी है। स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए डिजिटल मार्ग अपनाने को सरल बनाकर, यह एक पारदर्शी और परस्पर जुड़े डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम के निर्माण में तेजी लाने में मदद करेगा, जिससे रोगियों को तेज व अधिक विश्वसनीय देखभाल प्रदान की जा सकेगी।
ई-सुश्रुत एचएमआईएस से कितना अलग है ई-सुश्रुत@क्लिनिक
ई-सुश्रुत@क्लिनिक एप्लिकेशन ई-सुश्रुत एचएमआईएस सॉफ्टवेयर का हल्का संस्करण है। ई-सुश्रुत वर्तमान में देशभर के 17 एम्स और 4000 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों में इस्तेमाल किया जा रहा है। ई-सुश्रुत@क्लिनिक की ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को सरल रखा गया है। कोई भी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता अपने लैपटॉप/मोबाइल से अपनी स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री (एचएफआर) और स्वास्थ्य पेशेवर रजिस्ट्री (एचपीआर) के माध्यम से वेबपेज पर इसे ऑनबोर्ड कर सकता है। यदि स्वास्थ्य सेवा प्रदाता एचएफआर/एचपीआर पर पंजीकृत नहीं है तो वे स्वयं ईसुश्रुत@क्लिनिक पर पंजीकरण करा सकेंगे। इससे सरकारी और निजी दोनों क्लीनिकों के डॉक्टरों के लिए रोगियों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक पहुंचना और उन्हें अपडेट करना, टेलीमेडिसिन सेवाएं प्रदान करना तथा निदान एवं नुस्खे लिखना आसान हो जाएगा।



