नई दिल्ली: 15 अगस्त 2025 की शाम दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित हुमायूं मकबरे के परिसर में एक दुखद हादसा हुआ। शाम करीब चार बजे फतेह शाह दरगाह का एक हिस्सा अचानक ढह गया, जिसके मलबे में कई लोग दब गए। इस हादसे में छह लोगों की जान चली गई, और कई अन्य घायल हो गए। दिल्ली फायर सर्विस और बचाव दलों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया। मलबे से 10-12 लोगों को निकाला गया, जिनमें से घायलों को एम्स और एलएनजेपी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। बारिश के कारण कुछ लोग दरगाह के पास रुके थे, जिसने हादसे को और भयावह बना दिया।
हुमायूं मकबरे का ऐतिहासिक महत्व
हुमायूं का मकबरा दिल्ली के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में से एक है। इसे मुगल सम्राट हुमायूं की पहली पत्नी बेगा बेगम ने 1569-70 में बनवाया था। फारसी वास्तुकार मिर्क मिर्जा गियास और उनके बेटे सय्यद मुहम्मद ने इसकी भव्य डिजाइन तैयार की। यह भारतीय उपमहाद्वीप का पहला बगीचा-मकबरा है, जो लाल बलुआ पत्थर से बना है। 1993 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया, जिसके बाद इसका जीर्णोद्धार हुआ। यह मकबरा मुगल वास्तुकला का शानदार नमूना है और पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है।
परिसर में अन्य स्मारक
मकबरे के परिसर में कई छोटे स्मारक हैं, जिनमें ईसा खान नियाज़ी का मकबरा प्रमुख है। ईसा खान, सूरी वंश के शेरशाह सूरी के दरबार में एक महत्वपूर्ण सरदार थे, जिन्होंने 1547 में मुगलों के खिलाफ युद्ध लड़ा था। यह परिसर इतिहास और कला प्रेमियों को आकर्षित करता है, खासकर छुट्टियों के दौरान जब यहां भारी भीड़ होती है।
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बचाव और जांच
बचाव कार्य अभी भी जारी हैं, और प्रशासन हादसे की जांच कर रहा है। बारिश और पुरानी संरचना की कमज़ोरी को हादसे का संभावित कारण माना जा रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), जो मकबरे की देखरेख करता है, अब इस घटना के बाद सुरक्षा उपायों पर ध्यान दे रहा है। यह हादसा ऐतिहासिक धरोहरों के रखरखाव पर सवाल उठाता है।



