नई दिल्ली: अमूमन सुनने में आता है कि मोबाइल के मैसेज बॉक्स में आए लिंक पर क्लिक करते ही खाते से पैसे कट गए। इस जालजासी का शिकार हजारों लोग रोजाना होते हैं। इस तरह की ठगी से अब निजात मिलने की उम्मीद जगी है। वह इसलिए कि BSNL ने साइबर ठगों की जालसाजी का तार काटने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। यानी ठग अब आपको SMS में लिंक भेजकर धोखाधड़ी को अंजाम नहीं दे पाएंगे। कंपनी ने नेटवर्क-स्तरीय एंटी-स्पैम सक्रिय किया है। इससे एसएमएस में जालसाजी के लिंक मिलने से पहले ब्लॉक कर दिए जाएंगे।
न इंस्टॉल करना होगा ऐप, न बदलनी पड़ेंगी सेटिंग
दरअसल, बीएसएनएल ने अपने मोबाइल ग्राहकों के लिए नेटवर्क-साइड एंटी-स्पैम और एंटी-स्मिशिंग सुरक्षा को देश भर में लागू करने की घोषणा की है।
- इसके लिए न कोई ऐप इंस्टॉल करना होगा और न कोई सेटिंग बदलनी होगी। एसएमएस में संदिग्ध और फिशिंग यूआरएल का तुरंत पता लगाया जाता है और नेटवर्क के स्तर पर ही रोक दिया जाता है। ऐसे में फर्जी लिंक न पहुंचेंगे।
- ट्राई के डीएलटी/यूसीसी ढांचे के तहत वैध ओटीपी, बैंकिंग अलर्ट और सरकारी संदेश पहुंचते रहेंगे।
- बीएसएनएल के सभी सर्किलों में इसे लागू किया जा रहा है।
ऐसे करेगा काम
AI/ML, NLP खुफिया और लिंक एक्सपेंशन से जुड़ा यह सिस्टम लाइन रेट पर मेसेज को स्कोर करेगा। अनवांटेड इंडस्ट्रियल कम्यूनिकेशन को रोकने के लिए बनाए गए उद्योग ब्लॉकचेन डीएलटी स्टैक के साथ काम करेगा। यह स्मिशिंग के खिलाफ 99 प्रतिशत मतबूत साबित हुआ है। यह ठगी के नए तरीकों को रोकने में सक्षम होगा। जैसे वेब और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिये एक साथ हजारों-सैकड़ों लोगों को मेसेज भेजना।
क्या है खासियत
- रोजाना 1.5 मिलियन से अधिक धोखाधड़ी का पता लगाता है।
- हर महीने 35,000 से अधिक धोखाधड़ी वाले लिंक और 60,000 स्कैम वाले व्हाट्सएप और मोबाइल नंबरों की पहचान करता है।
- एआई/एमएल इंजन, प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (एनएलपी) और गहन शिक्षण द्वारा संचालित।



