नई दिल्ली: नौ सेना के बेड़े में यार्ड 3027 (इक्षक) जहाज शामिल हो गया है। बड़े सर्वे पोत की श्रेणी में तीसरा जहाज है। इसे नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने संचालित किया है। इसका निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने किया है।
पिछले साल मिले थे दो जहाज
इस कैटिगरी के पहले जहाज आईएनएस संध्याक को 3 फरवरी 2024, आईएनएस निर्देशक को 18 दिसंबर 2024 को कमीशन किया गया था। चार बड़े सर्वेक्षण पोतों के लिए अनुबंध पर 30 अक्टूबर को हस्ताक्षर किए गए थे।
हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण होगा मजबूत
इस जहाज का उद्देश्य बंदरगाहों और उनके पहुंच मार्गों का तटीय और गहरे पानी में हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करना है। नौवहन चैनलों और मार्गों का निर्धारण करना भी है। यह जहाज रक्षा और नागरिक उपयोग के लिए समुद्र विज्ञान और भू-भौतिकीय डेटा भी एकत्र करेगा।
110 मीटर है लंबा
लगभग 3400 टन के विस्थापन और 110 मीटर की कुल लंबाई के वाला इक्षक अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफिक उपकरणों जैसे डेटा अधिग्रहण एवं संसाधित करने वाली प्रणाली, स्वायत्त अंडरवॉटर वाहन, दूर से संचालित वाहन, डीजीपीएस लंबी दूरी की स्थिति निर्धारण प्रणाली और डिजिटल साइड स्कैन सोनार आदि से लैस है। दो डीजल इंजनों द्वारा संचालित ये जहाज 18 नॉट से अधिक की गति प्राप्त कर सकता है।
80 फीसदी स्वदेशी है
इक्षक में लागत के हिसाब से 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इस जहाज से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री शक्ति और मजबूत होगी। इक्षक महिला अधिकारियों और नाविकों के लिए आवास के साथ सुपुर्द किया जाने वाला पहला एसवीएल जहाज है।



