नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन में चल रहे युद्ध को लेकर सख्त चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर 15 अगस्त, 2025 को अलास्का में होने वाली उनकी मुलाकात के बाद पुतिन युद्ध समाप्त करने पर सहमत नहीं हुए, तो रूस को बेहद गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। यह बयान बुधवार को वाशिंगटन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आया, जहां ट्रंप ने यूक्रेन में साढ़े तीन साल से चल रहे संघर्ष को खत्म करने की अपनी मंशा दोहराई। यह पहला मौका होगा जब ट्रम्प और पुतिन अमेरिकी धरती पर आमने-सामने बात करेंगे, जिसका उद्देश्य यूक्रेन संकट का हल निकालना है।
जेलेंस्की का साफ इनकार: जमीन नहीं छोड़ेंगे
इसी दिन ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और कई यूरोपीय नेताओं के साथ एक वर्चुअल बैठक की। इस बैठक में ट्रंप ने सुझाव दिया कि युद्ध को खत्म करने के लिए यूक्रेन और रूस को क्षेत्रीय अदला-बदली पर विचार करना पड़ सकता है। हालांकि, जेलेंस्की ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की जमीन का कोई भी फैसला बिना उनकी सहमति के नहीं हो सकता और यह उनके संविधान के खिलाफ है। जेलेंस्की ने जोर देकर कहा, पहले युद्धविराम होना चाहिए, फिर मजबूत सुरक्षा गारंटी मिलनी चाहिए। रूस को यूक्रेन के यूरोप या नाटो में शामिल होने की संभावना पर रोक लगाने का कोई हक नहीं है। जेलेंस्की ने यह भी आरोप लगाया कि पुतिन शांति की बजाय यूक्रेन पर कब्जे की मंशा रखते हैं और पश्चिमी प्रतिबंधों को बेअसर बताकर दुनिया को गुमराह कर रहे हैं। बैठक में फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, इटली, पोलैंड, फिनलैंड, यूरोपीय यूनियन और नाटो के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया। सभी ने इस बात पर जोर दिया कि यूक्रेन को किसी भी शांति समझौते में शामिल करना अनिवार्य है, ताकि रूस को अनुचित लाभ न मिले।
यूरोप और यूक्रेन की चिंता: रूस को फायदा न हो
यूरोपीय नेताओं और जेलेंस्की को डर है कि ट्रंप और पुतिन के बीच कोई ऐसा समझौता हो सकता है, जो यूक्रेन के हितों को नजरअंदाज कर दे। खास तौर पर, रूस पहले ही यूक्रेन के करीब 20% हिस्से पर कब्जा कर चुका है, और वह डोनबास और अन्य क्षेत्रों को अपने नियंत्रण में रखना चाहता है। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा, “यूक्रेन की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। रूस को यूक्रेन की संप्रभुता पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है।” फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी कहा कि ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्रीय मुद्दों पर अंतिम फैसला यूक्रेन का होगा।
ट्रम्प की रणनीति: युद्धविराम पहले, फिर त्रिपक्षीय वार्ता
ट्रम्प ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अलास्का की बैठक एक परीक्षण है, जिससे वह पुतिन की शांति के प्रति गंभीरता को परखना चाहते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर यह बैठक सफल रही, तो जल्द ही पुतिन, जेलेंस्की और उनके बीच एक त्रिपक्षीय मुलाकात हो सकती है, संभवतः यूरोप के किसी तटस्थ देश में। हालांकि, ट्रम्प ने यह भी कहा कि अगर पुतिन ने सकारात्मक जवाब नहीं दिया, तो दूसरी बैठक की जरूरत नहीं पड़ेगी। ट्रम्प ने जोर देकर कहा, यह युद्ध बाइडेन का बनाया हुआ है। मैं इसे खत्म करना चाहता हूं, जैसे मैंने पिछले छह महीनों में पांच अन्य युद्धों को खत्म किया। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर पुतिन युद्ध रोकने से इन्कार करते हैं, तो रूस को खतरनाक परिणाम भुगतने होंगे, हालांकि उन्होंने इसका ब्योरा नहीं दिया। माना जा रहा है कि ये परिणाम कड़े आर्थिक प्रतिबंध या अन्य राजनयिक दबाव हो सकते हैं।
ट्रम्प और पुतिन की पिछली बातचीत
ट्रम्प और पुतिन इस साल कई बार फोन पर बात कर चुके हैं:
12 फरवरी, 2025: यूक्रेन युद्ध समाप्त करने पर चर्चा।
18 मार्च, 2025: युद्धविराम और शांति प्रक्रिया पर बात।
19 मई, 2025: दो घंटे की लंबी बातचीत में कई मुद्दों पर विचार।
4 जून, 2025: यूक्रेन और ईरान पर एक घंटे की चर्चा।
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मुख्य बिंदु
ट्रंप की चेतावनी: पुतिन को 15 अगस्त की अलास्का बैठक के बाद युद्ध न रोकने पर “गंभीर परिणाम” की धमकी।
जेलेंस्की का रुख: यूक्रेन की जमीन नहीं छोड़ेंगे, युद्ध विराम और सुरक्षा गारंटी जरूरी।
यूरोप की मांग: यूक्रेन को शांति वार्ता में शामिल करना अनिवार्य।
बैठक का मकसद: ट्रम्प पुतिन की शांति के प्रति गंभीरता परखना चाहते हैं।
पिछली बातचीत: 2025 में ट्रंप और पुतिन के बीच चार बार फोन पर चर्चा।



