मुजफ्फरपुर: बिहार के सूबे में सड़क दुर्घटनाओं के बाद न्याय और सरकारी मदद का इंतजार कर रहे परिवारों को बड़ा झटका लगा है। राज्य भर में हुए 280 सड़क हादसों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सरकारी अस्पतालों में अटकी हुई हैं, जिससे न केवल पुलिस की जांच रुक गई है बल्कि मृतकों के आश्रित भी बीमा और सरकारी अनुदान का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
इस गंभीर समस्या का खुलासा हाल ही में इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस (IRAD) की मासिक समीक्षा बैठक में हुआ। पुलिस मुख्यालय ने स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने की मांग की है। इसके बाद, राज्य स्वास्थ्य विभाग ने मुजफ्फरपुर समेत सभी जिलों के सिविल सर्जनों (सीएस) को जल्द से जल्द लंबित रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है।
मुजफ्फरपुर में भी अटकी रिपोर्टें
मुजफ्फरपुर जिले में भी स्थिति चिंताजनक है। यहां 6 पोस्टमार्टम रिपोर्ट, 1 मेडिको लीगल रिपोर्ट, 5 ड्रंकन ड्राइवर रिपोर्ट और 1 हार्ट रिपोर्ट लंबित है। इन रिपोर्टों के बिना पुलिस जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है।
पीड़ित परिवारों को हो रही है परेशानी
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अभाव में, सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वालों के परिवारों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है:
बीमा दावा अटका: बीमा कंपनियां पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही दावा स्वीकार करती हैं। रिपोर्ट न होने के कारण कई परिवारों का बीमा दावा अटका हुआ है।
राहत अनुदान में देरी: बिहार सरकार सड़क हादसों में मारे गए व्यक्ति के परिवार को 5 लाख रुपये तक का राहत अनुदान देती है। यह राशि भी रिपोर्ट न मिलने के कारण जारी नहीं हो पा रही है।
क्या है पोस्टमार्टम और मेडिको लीगल रिपोर्ट का महत्व
सड़क दुर्घटना में मौत की वैज्ञानिक पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम और मेडिको लीगल रिपोर्ट बहुत जरूरी होती हैं। इन रिपोर्टों से यह पता चलता है कि मौत का असली कारण क्या था और शरीर के किन-किन अंगों को गंभीर चोटें लगी थीं। ये रिपोर्टें अदालत में मजबूत सबूत के तौर पर भी पेश की जाती हैं। क्षेत्रीय अपर निदेशक स्वास्थ्य, डॉ. सरिता शंकर ने बताया कि वे सीएस से इस मामले में जानकारी लेंगी और जल्द से जल्द रिपोर्टें भेजने की पहल करेंगी। इस देरी से न सिर्फ कानूनी प्रक्रिया बाधित हो रही है, बल्कि पीड़ितों के परिवारों की आर्थिक और मानसिक परेशानी भी बढ़ रही है।
इस समस्या के कारण
पुलिस की जाँच रुक जाती है: रिपोर्ट के बिना पुलिस आगे की जाँच नहीं कर पाती और मामले लंबित हो जाते हैं।
पीड़ितों को आर्थिक मदद नहीं मिलती: सड़क हादसों में मारे गए लोगों के परिवारों को सरकार द्वारा दिया जाने वाला राहत अनुदान (₹5 लाख तक) और बीमा का पैसा नहीं मिल पाता। बीमा कंपनियाँ पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बिना दावा मंजूर नहीं करतीं।
गौरतलब है कि इस खुलासे के बाद पुलिस मुख्यालय ने स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा है और इस समस्या को तुरंत ठीक करने का निर्देश दिया है, ताकि पीड़ितों के परिवारों को न्याय और आर्थिक सहायता मिल सके।



