पटना: बिहार की सियासत में इन दिनों ‘दो वोटर आईडी’ का मुद्दा गरमाया हुआ है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के बाद अब राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा पर भी दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची में नाम दर्ज होने का आरोप लगा है। इस खुलासे के बाद चुनावी नैतिकता और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
विजय सिन्हा पर नया आरोप
हाल ही में, एनडीए ने तेजस्वी यादव पर दो विधानसभा क्षेत्रों में वोटर आईडी होने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग को एक लिखित जवाब सौंपा है। राजद सांसद मनोज झा ने इस मामले में चुनाव आयोग की आलोचना की है और कहा है कि अब फैसला आयोग को लेना है। इसी बीच, कांग्रेस ने दावा किया है कि उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा का नाम भी दो अलग-अलग स्थानों पर मतदाता सूची में दर्ज है। बिहार कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर पोस्ट कर इस मामले की तत्काल जांच की मांग की है और इसे ‘लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल’ बताया है।
चुनाव आयोग पर बढ़ा दबाव
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मतदाता सूची में गड़बड़ी और नाम काटे जाने को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है। तेजस्वी यादव को चुनाव आयोग ने नोटिस भेजकर 16 अगस्त तक असली पहचान पत्र का विवरण मांगा है। अब उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा पर लगे आरोपों के बाद चुनाव आयोग की साख और भी ज़्यादा दांव पर लग गई है।
- विवाद की शुरुआत: इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब एनडीए ने विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पर दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों (राघोपुर और पटना) में वोटर आईडी रखने का आरोप लगाया।
- आरोप-प्रत्यारोप: तेजस्वी यादव के मामले में चुनाव आयोग की आलोचना करते हुए, राजद ने पलटवार किया और अब डिप्टी सीएम विजय सिन्हा पर भी दो वोटर आईडी रखने का आरोप लगाया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विजय सिन्हा का नाम दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में दर्ज होने की बात कही जा रही है, हालांकि अभी तक चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर इस मुद्दे पर तीखी बहस छिड़ी हुई है, जिससे सियासी पारा लगातार चढ़ रहा है।
कांग्रेस ने की जांच की मांग
बिहार कांग्रेस ने इसे ‘चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर खतरा’ बताते हुए चुनाव आयोग से तुरंत कार्रवाई करने की मांग की है। कांग्रेस ने कहा है कि अगर यह आरोप सही हैं तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन है और आयोग को इस पर सख्त रुख अपनाना चाहिए। इस पूरे मामले में अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग पर टिकी हैं कि वह इस ‘डबल वोटर आईडी’ विवाद पर क्या कदम उठाता है।
चुनावी नैतिकता पर सवाल
यह पूरा मामला चुनाव आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि अब दोनों ही प्रमुख राजनीतिक खेमों के नेताओं पर एक ही तरह के आरोप लगे हैं। इससे मतदाता सूची की प्रामाणिकता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।



