ECI की बड़ी कार्रवाई: बिहार के 17 राजनीतिक दलों की मान्यता रद्द

ECI ने पिछले छह सालों में चुनाव लड़ने के मानदंडों को पूरा करने में विफल रहने वाले 17 बिहारी राजनीतिक दलों को सूची से हटा दिया है।

Share This Article:

पटना: ECI ने बिहार के 17 पंजीकृत, गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को अपनी सूची से हटा दिया है, जिससे वे आगामी चुनावों में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। यह फैसला इन दलों द्वारा पिछले छह वर्षों में चुनाव लड़ने के मानदंडों को पूरा करने में विफल रहने और उनके पंजीकृत कार्यालयों का पता न मिलने के कारण लिया गया है।

देशव्यापी कार्रवाई का हिस्सा

चुनाव आयोग ने देश भर के 334 ऐसे दलों को सूची से हटाया है, जिसके बाद अब कुल 2520 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल ही बचे हैं। इस कार्रवाई के बाद, इन दलों को जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29 बी और 29 सी तथा चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के तहत मिलने वाले किसी भी लाभ का अधिकार नहीं होगा। हालांकि, इन दलों को 30 दिनों के भीतर आयोग में अपील करने का मौका दिया गया है।

कार्रवाई का मुख्य कारण

यह कार्रवाई इन दलों के 2019 से अब तक पिछले छह वर्षों में किसी भी चुनाव में भाग लेने के आवश्यक मानदंडों को पूरा न कर पाने के कारण की गई है। इसके अलावा, आयोग द्वारा की गई जांच में यह भी पाया गया कि इन पार्टियों के कार्यालय भी उनके पंजीकृत दस्तावेजों में दिए गए पते पर मौजूद नहीं थे। इस जांच के बाद ही चुनाव आयोग ने यह बड़ा फैसला लिया है

बिहार के 17 दलों की सूची

  • बिहार के जिन 17 दलों को सूची से हटाया गया है, उनमें शामिल हैं।
  • भारतीय बैकवर्ड पार्टी, पटना
  • भारतीय सुराज दल, पटना
  • भारतीय युवा पार्टी (डेमोक्रेटिक), पटना
  • भारतीय जनतंत्र सनातन दल, बक्सर
  • बिहार जनता पार्टी, सारण
  • देसी किसान पार्टी, गया
  • गांधी प्रकाश पार्टी, कैमूर
  • हमदर्दी जन संरक्षक समाजवादी विकास पार्टी, बक्सर
  • क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी, पटना
  • क्रांतिकारी, पटना
  • लोक आवाज दल, पटना
  • लोकतांत्रिक समता दल, पटना
  • नेशनल जनता पार्टी (इंडियन), वैशाली
  • राष्ट्रवादी जन कांग्रेस, पटना
  • राष्ट्रीय सर्वोदय पार्टी, पटना
  • सर्वजन कल्याण लोकतांत्रिक पार्टी, पटना
  • व्यवसायी किसान अल्पसंख्यक मोर्चा, जमुई, बिहार

इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य उन पार्टियों को हटाना है जो निष्क्रिय हैं और नियमों का पालन नहीं कर रही हैं।
इस खबर के पीछे के मुख्य बिंदु ये हैं।
निष्क्रियता: इन दलों को इसलिए हटाया गया क्योंकि वे पिछले छह वर्षों (2019 से अब तक) में कोई भी चुनाव लड़ने के आवश्यक मानदंडों को पूरा करने में विफल रहे।
पते का पता न होना: निर्वाचन आयोग ने जांच में पाया कि इन पार्टियों के कार्यालय भी उनके पंजीकृत दस्तावेजों में दिए गए पते पर मौजूद नहीं थे।
कानूनी आधार: यह कार्रवाई जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और चुनाव चिह्न आदेश, 1968 के प्रावधानों के तहत की गई है।
परिणाम: इस कार्रवाई के बाद, ये दल अब चुनाव आयोग से मिलने वाले किसी भी लाभ के हकदार नहीं रहेंगे और आगामी चुनावों में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।
देशव्यापी अभियान: यह फैसला सिर्फ बिहार के लिए नहीं है, बल्कि यह एक देशव्यापी अभियान का हिस्सा है जिसमें कुल 334 दलों को हटाया गया है।
यह फैसला बिहार में आगामी चुनावों के परिदृश्य पर प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि इन दलों के पास अब चुनाव लड़ने का विकल्प नहीं रहेगा।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

https://newgindia.com/author/usha/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.