नई दिल्ली: अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के सहयोग से उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रमुखों के साथ एक राष्ट्रीय ऑनलाइन संवाद का आयोजन किया ताकि परिसरों में नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) के कार्यान्वयन पर चर्चा और उसे गति दी जा सके। इस सत्र के साथ अभियान की पाँचवीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक महीने तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान की शुरुआत हुई।
नशा मुक्त भारत अभियान को आगे बढ़ा रहा AICTE
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा शुरू किए गए नशा मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य मादक द्रव्यों के सेवन के हानिकारक प्रभावों के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करना और एक नशा मुक्त समाज का निर्माण करना है। इस वर्ष के विशेष आउटरीच कार्यक्रम का लक्ष्य 1 अगस्त से 31 अगस्त, 2025 के बीच ऑफलाइन और ऑनलाइन कार्यक्रमों के माध्यम से 3 करोड़ से अधिक व्यक्तियों तक पहुँचना है। इनमें 13 अगस्त को नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ सामूहिक शपथ, छात्रों के नेतृत्व में जागरूकता अभियान, मानव श्रृंखलाएँ, कार्यशालाएँ, एनसीसी/एनएसएस आउटरीच और हैशटैग #AzadiFromDrugs का उपयोग करते हुए सोशल मीडिया पहल शामिल हैं।
नशा मुक्त समाज और शैक्षणिक संस्थान
सत्र को संबोधित करते हुए एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो. टी.जी. सीताराम ने एक स्वस्थ और प्रगतिशील समाज के निर्माण में शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “भारत में, नशा एक चुनौती है जो कई युवा छात्रों के जीवन और भविष्य को प्रभावित कर रहा है। पिछले पाँच वर्षों में, नशा मुक्त भारत अभियान ने नागरिक समाज, सरकारी एजेंसियों और शैक्षणिक संस्थानों को एकजुट किया है, और युवा इस बदलाव का नेतृत्व कर रहे हैं। इस वर्ष, जब हम इसकी उपलब्धियों का जश्न मना रहे हैं, हमने भौतिक पहुँच और डिजिटल जुड़ाव के माध्यम से 3 करोड़ लोगों तक पहुँचने का एक बड़ा लक्ष्य रखा है। हमारे कॉलेज और विश्वविद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र नहीं हैं; वे जीवन-निर्माण के केंद्र हैं। मादक द्रव्यों का सेवन स्वास्थ्य, उत्पादकता, परिवारों और हमारे राष्ट्र की प्रगति के लिए खतरा है। अगर हमारे युवा, जिन्हें उत्पादकता, नवाचार और कौशल-निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, हानिकारक व्यसनों की ओर मुड़ जाते हैं, तो नुकसान केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय होगा। मैं सभी संस्थानों से आग्रह करता हूं कि प्रतीकात्मक भागीदारी से आगे बढ़ते हुए इस अभियान को व्यापक बनाएं। 13 अगस्त को, आइए हम प्रभावशाली जागरूकता अभियान चलाएँ, परिवर्तनकारी कार्यशालाएँ आयोजित करें और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस संदेश को प्रसारित करें। शिक्षा केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता के बारे में नहीं है, बल्कि जिम्मेदार, सामाजिक रूप से जागरूक नागरिक बनाने के बारे में भी है। आइए, इस अभियान को परिसर की संस्कृति का एक स्थायी हिस्सा बनाएँ और अपने छात्रों को न केवल ‘नशे को ना’, बल्कि ‘जीवन को हाँ, सपनों को हाँ और एक स्वस्थ भारत को हाँ’ कहने के लिए प्रेरित करें।
नशा मुक्ति में योग की भूमिका
मुख्य अतिथि, डॉ. एच.आर. नागेंद्र गुरुजी, कुलाधिपति, एस-व्यासा डीम्ड-टू-बी-यूनिवर्सिटी ने मादक द्रव्यों के सेवन से निपटने में पारंपरिक प्रथाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा, “योग और ध्यान हमारे युवाओं को एक स्वस्थ और संपूर्ण जीवन की ओर ले जाने के शक्तिशाली साधन हैं। योग चिकित्सा शारीरिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और मानसिक स्पष्टता को बहाल करके व्यसन पर काबू पाने में कारगर साबित हुई है। मादक द्रव्यों का सेवन न केवल व्यक्तिगत नुकसान पहुँचाता है, बल्कि परिवारों को भी पीड़ा पहुँचाता है और सामाजिक सद्भाव को नष्ट करता है। प्रत्येक शैक्षणिक परिसर को नशा मुक्त परिसर बनने का लक्ष्य रखना चाहिए। साथ ही, हमें स्वस्थ भारत और स्वस्थ ग्राम के दृष्टिकोण को अपनाना चाहिए, यह सुनिश्चित करते हुए कि मादक द्रव्यों के सेवन के खिलाफ लड़ाई हर समुदाय तक पहुँचे। योग और स्वास्थ्य कार्यक्रमों को परिसर के दैनिक जीवन में शामिल करके, हम एक ऐसी पीढ़ी का निर्माण कर सकते हैं जो शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से मजबूत और सामाजिक रूप से जिम्मेदार हो।”
अभियान में सक्रिय योगदान का आह्वान
ऑनलाइन संवाद का समापन सामूहिक कार्रवाई के आह्वान के साथ हुआ, जिसमें उच्च शिक्षा संस्थानों को https://nmba.dosje.gov.in पर शपथ लेने, जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित करने और नशा मुक्त भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया गया।



