SIR: SC ने 65 लाख हटाए गए नामों पर रिपोर्ट मांगी

सुप्रीम कोर्ट (SC) ने चुनाव आयोग से हटाए गए नामों का पूरा विवरण 9 अगस्त तक मांगा है। एनजीओ और कोर्ट द्वारा चुनाव आयोग से स्पष्टता की मांग की जा रही है।

Share This Article:

पटना: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच चुनाव आयोग (EC) ने स्पष्ट किया है कि अब तक किसी भी राजनीतिक दल ने मसौदा सूची को लेकर कोई दावा या आपत्ति प्रस्तुत नहीं की है। 1 अगस्त को जारी मसौदा सूची में बदलाव के लिए आयोग ने एक महीने तक आवेदन देने की समयसीमा तय की है, जबकि आयोग के नियम अनुसार प्राप्त दावों और आपत्तियों का निपटारा दाखिल के 7 दिनों बाद किया जाएगा।

अब तक की स्थिति

मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी, 5,015 से अधिक आपत्तियाँ प्राप्त हुई हैं। 1 अगस्त 2025 को जारी हुई मसौदा सूची के बाद चुनाव आयोग (EC) द्वारा मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया तेज़ी से जारी है। आयोग ने बताया है कि 30 सितंबर 2025 तक नागरिक दावे और आपत्तियाँ दर्ज कर सकते हैं।

नए मतदाता आवेदन

अब तक 27,517 नए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर चुके हैं।
इस बीच चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है, “बिना वैध कारण और उचित सुनवाई के किसी मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा।”
आयोग का यह बयान उन आशंकाओं के बीच आया है जिसमें कुछ नागरिकों द्वारा नाम हटाए जाने की शिकायतें की गई थीं।
जनता से अपील की गई है कि वे निर्धारित समयसीमा के भीतर अपने दस्तावेज़ों की पुष्टि कर लें और अगर नाम गायब है या कोई त्रुटि है, तो दावा/आपत्ति अवश्य दर्ज करें।

राजनीतिक दल अब तक क्यों चुप

मसौदा सूची आने के एक हफ्ते बाद भी किसी भी दल ने औपचारिक दावा या आपत्ति दर्ज नहीं की। विपक्षी खेमे द्वारा चुनाव आयोग पर आरोप तो लगाए जा रहे हैं कि मतदाताओं के नाम “साज़िशन” हटाए जा रहे हैं, लेकिन आयोगी प्रक्रिया में भागीदारी नहीं दिखाई गई है।
विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक ने संसद के मानसून सत्र में बिहार SIR पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया है और चर्चा की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट की सख़्ती

NGO AES (Association for Democratic Reforms) की याचिका पर सुनवाई के दौरान SC ने चुनाव आयोग से सवाल किया है कि मसौदा सूची से 65 लाख मतदाताओं के नाम क्यों हटाए गए? क्या ये मृतक थे, पलायन कर चुके थे या कोई अन्य कारण था?
SC ने आदेश दिया कि आयोग 9 अगस्त तक हटाए गए मतदाताओं का पूरा विवरण कोर्ट को दे। यह विवरण राजनीतिक दल और याचिकाकर्ता एनजीओ को भी सौंपा जाए।
सुनवाई के दौरान SC की बेंच (जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां, जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह) ने कहा, “नाम हटाने का कारण स्पष्ट होना चाहिए।”

चुनाव आयोग की सफाई

आयोग ने कहा है कि हटाए गए सभी नामों की विवेचना और सत्यापन प्रक्रिया के तहत कार्यवाही की जा रही है। अंतिम सूची आने से पहले सभी लोगों को दावा, आपत्ति का पूरा मौका मिलेगा।
आयोग ने यह भी बताया कि राजनीतिक दलों को पूरी जानकारी और ड्राफ्ट डेटा पहले ही उपलब्ध करा दी गई है।
गौरतलब है कि 65 लाख मतदाताओं के हटने का मामला अब केवल प्रशासनिक नहीं, राजनीतिक और संवैधानिक सवाल भी पैदा कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी नजर और विपक्ष का बढ़ते राजनीतिक दबाव के बावजूद राजनीतिक दलों द्वारा अनौपचारिक विरोध तो दिख रहा है, लेकिन औपचारिक प्रक्रिया में भागीदारी नहीं हो रही। यही सबसे बड़ा सवाल बन गया है।आयोग पर निष्पक्षता बनाए रखने का भारी दबाव है।सभी की निगाहें अब 9 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिक गई हैं।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

https://newgindia.com/author/usha/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.