नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) में एक नई सोच और सख्त रुख के संकेत मिल रहे हैं। मुख्य कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) के मार्गदर्शन में टीम इंडिया में अब ‘स्टार कल्चर’ यानी विशेष खिलाड़ियों को दी जाने वाली छूट का दौर खत्म होता नजर आ रहा है। इंग्लैंड के खिलाफ (Ind vs Eng) ओवल में मिली जीत ने इस दिशा में गंभीर को आत्मविश्वास और ऊर्जा दी है। अब तक टीम में कुछ खिलाड़ी ऐसे रहे हैं जो अपनी सुविधा के मुताबिक सीरीज चुनते थे, लेकिन अब यह रवैया अधिक समय तक स्वीकार्य नहीं होगा।
वर्कलोड मैनेजमेंट पर सख्त नीति
सूत्रों के अनुसार, बीसीसीआई, चयन समिति और कोच गंभीर (Gautam Gambhir) इस बात पर सहमत हैं कि वर्कलोड मैनेजमेंट की आड़ में कोई भी खिलाड़ी मनमानी नहीं कर पाएगा। विशेष रूप से जो खिलाड़ी तीनों फॉर्मेट में नियमित हैं, उन्हें अब एक स्पष्ट संदेश दे दिया जाएगा कि जरूरी मुकाबलों से पीछे नहीं हटा जा सकता।
एक वरिष्ठ बोर्ड अधिकारी का कहना है कि, “वर्कलोड मैनेजमेंट पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा रहा है, लेकिन अब इसका व्यवहारिक और तर्कसंगत इस्तेमाल किया जाएगा। खासकर तेज गेंदबाजों के लिए यह जरूरी है, लेकिन किसी भी अहम सीरीज को छोड़ने का अब कोई बहाना नहीं चलेगा।”
सिराज का उदाहरण और टीम से बड़ा कोई नहीं
मोहम्मद सिराज (Mohammed Siraj) का प्रदर्शन इसका बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट में 185.3 ओवर डाले और नेट्स में घंटों गेंदबाजी की। इसके बावजूद उनकी फिटनेस और प्रदर्शन उच्चतम स्तर पर रहा।
सिराज के साथ प्रसिद्ध कृष्णा और आकाश दीप जैसे गेंदबाजों ने भी साबित किया है कि टीम इंडिया अब केवल सितारों पर निर्भर नहीं है। चाहे कोई भी खिलाड़ी हो, टीम से बड़ा अब कोई नहीं होगा।
बुमराह की अनुपस्थिति बनी चर्चा का विषय
जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) की लगातार पांच टेस्ट खेलने में असमर्थता ने बीसीसीआई को सोचने पर मजबूर किया है। इस बात पर भी सवाल उठे हैं कि बेंगलुरु स्थित नेशनल क्रिकेट अकादमी की स्पोर्ट्स साइंस यूनिट कितनी प्रभावी है।
सूत्रों की मानें तो बुमराह सितंबर में एशिया कप खेलेंगे, लेकिन इसके कारण वह अक्टूबर में वेस्टइंडीज टेस्ट सीरीज से बाहर रहेंगे। हालांकि, नवंबर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दो टेस्ट में उनकी वापसी तय मानी जा रही है।
नई टीम, नई सोच
नितिन पटेल के इस्तीफे के बाद अब बीसीसीआई ने नई स्पोर्ट्स साइंस टीम को जिम्मेदारी सौंपी है। उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे खिलाड़ियों को ‘कॉटन वूल’ यानी अत्यधिक संरक्षण देने की बजाय उन्हें लगातार खेलने के लिए फिट बनाएंगे।
गंभीर का स्पष्ट संदेश है—”हर खिलाड़ी बराबर है, चाहे वह कोई भी हो। अब प्रदर्शन ही प्राथमिकता होगी, न कि नाम।”
टीम इंडिया (Team India) में अब नई व्यवस्था के तहत हर खिलाड़ी को समान नजर से देखा जाएगा। स्टारडम के बजाय समर्पण, फिटनेस और निरंतरता ही चयन का मापदंड होंगे।



