नई दिल्ली: Khejri controversy in Barmer: खेजड़ी, राजस्थान का राजकीय वृक्ष, केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि थार मरुस्थल की जीवनरेखा और सांस्कृतिक पहचान है। यह पेड़ छाया, पशुओं के लिए चारा, और मिट्टी को उपजाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 1730 में बिश्नोई समुदाय की अमृता देवी के नेतृत्व में 363 लोगों ने खेजड़ी को बचाने के लिए अपनी जान दी थी। यह बलिदान खेजड़ली नरसंहार के नाम से इतिहास में दर्ज है, जिसने पर्यावरण संरक्षण की मिसाल कायम की। आज भी खेजड़ली में शहीदी मेला इस बलिदान की याद दिलाता है।
बाड़मेर में सोलर कंपनियों पर आरोप
बाड़मेर जिले के बरियाड़ा और खोड़ाल गांवों में सोलर कंपनियों पर खेजड़ी और अन्य पेड़ों को काटने का गंभीर आरोप लगा है। स्थानीय किसानों का दावा है कि कंपनियों ने सोलर प्लांट लगाने के लिए बिना उचित अनुमति के सैकड़ों पेड़ उखाड़े और कुछ को जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश की। यह क्षेत्र खड़ीन भूमि का हिस्सा है, जो बारिश के पानी को संग्रहित कर जैव विविधता को बनाए रखता है। ग्रामीणों का कहना है कि पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को अपूरणीय क्षति हो रही है।
विधायक रविंद्र सिंह भाटी का विरोध
शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने बरियाड़ा-खोड़ाल में धरना स्थल पर रात बिताई और ग्रामीणों के साथ मिलकर सोलर कंपनियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। भाटी ने कहा कि खेजड़ी राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर है और इसे नष्ट करना अपराध है। उन्होंने दोषी कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा। सोशल मीडिया पर #खेजड़ी_बचाओ अभियान ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
स्थानीय लोग प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि पहले से शिकायतें मिलने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि सोलर कंपनियों ने नियमों का उल्लंघन कर जमीन पर कब्जा किया और संरक्षित पेड़ों को नष्ट किया।



