Trump की टैरिफ धमकी पर भारत का करारा जवाब, कहा- पहले अपने अंदर…

ट्रम्प ने भारत पर रूस से तेल खरीदने और यूक्रेन युद्ध को अनदेखा करने का आरोप लगाया था। वहीं, भारत ने कहा है कि अमेरिका खुद रूस से आयात कर रहा है।

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नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) की भारत पर और अधिक टैरिफ लगाने की धमकी के जवाब में भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर भारत पर रूस से तेल खरीदने और यूक्रेन युद्ध को अनदेखा करने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में भारत ने स्पष्ट किया कि अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) खुद रूस से यूरेनियम, उर्वरक, और रसायनों का आयात कर रहे हैं, फिर भी भारत को निशाना बनाना अनुचित है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, भारत को निशाना बनाना गलत और तर्कहीन है। हम अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे।

भारत का सात सूत्री जवाब

  • यूक्रेन संकट के बाद प्रोत्साहन: यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने भारत को रूस से तेल आयात करने के लिए प्रोत्साहित किया था ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रहे।
  • उपभोक्ताओं के हित में आयात: भारत का रूस से तेल आयात भारतीय उपभोक्ताओं के लिए किफायती और स्थिर ऊर्जा कीमतें सुनिश्चित करने के लिए है।
  • पश्चिमी देशों का दोहरा रवैया: भारत की आलोचना करने वाले देश, जैसे अमेरिका और EU, खुद रूस के साथ व्यापार कर रहे हैं, जो भारत के व्यापार से कहीं अधिक है।
  • EU-रूस व्यापार: 2024 में EU का रूस के साथ वस्तुओं का व्यापार 67.5 बिलियन यूरो और 2023 में सेवाओं का व्यापार 17.2 बिलियन यूरो रहा। EU ने 2024 में रूस से 16.5 मिलियन टन LNG आयात किया, जो 2022 के रिकॉर्ड को पार करता है।
  • अमेरिका का रूस से आयात: अमेरिका अपने परमाणु उद्योग के लिए यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए पैलेडियम, उर्वरक, और रसायनों का आयात रूस से करता है। 2024 में अमेरिका ने रूस से 3 बिलियन डॉलर का सामान आयात किया, और 2025 के पहले पांच महीनों में यह आंकड़ा 2.09 बिलियन डॉलर रहा।
  • विविध व्यापार: EU और रूस के बीच व्यापार केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उर्वरक, खनन उत्पाद, रसायन, लोहा, इस्पात, मशीनरी, और परिवहन उपकरण भी शामिल हैं।
  • राष्ट्रीय हित सर्वोपरि: भारत ने दोहराया कि वह अपनी आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।

ट्रम्प की धमकी और भारत की स्थिति
ट्रम्प ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर उसे खुले बाजार में मुनाफे के साथ बेच रहा है और यूक्रेन में हो रही हिंसा की परवाह नहीं करता। उन्होंने भारत पर 25% टैरिफ और अतिरिक्त “पेनल्टी” लगाने की घोषणा की, जो 7 अगस्त से लागू होगी। ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा, लेकिन भारत ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि आयात की नीति कीमत, क्रूड की गुणवत्ता, और आर्थिक कारकों पर आधारित है।

चीन पर चुप्पी, भारत पर निशाना
ट्रम्प ने भारत को निशाना बनाया, लेकिन रूस के सबसे बड़े क्रूड तेल खरीदार चीन पर कोई टिप्पणी नहीं की। आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर 2022 से जून 2025 तक रूस के कुल क्रूड निर्यात का 47% हिस्सा चीन ने खरीदा, जबकि भारत ने 38%। EU और तुर्की ने 6-6% हिस्सा लिया। भारत ने तर्क दिया कि उसका तेल आयात वैश्विक बाजार की अस्थिरता के कारण जरूरी था, जब पारंपरिक आपूर्तिकर्ता यूरोप की ओर मुड़ गए थे।

अमेरिकी सलाहकार का बयान
ट्रम्प के सलाहकार स्टीफन मिलर ने फॉक्स न्यूज पर कहा कि भारत अमेरिका के साथ ईमानदारी नहीं बरत रहा और रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने भारत के उच्च टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं की आलोचना की। जवाब में भारत ने कहा कि उसका रूस के साथ व्यापार राष्ट्रीय जरूरतों से प्रेरित है, जबकि अमेरिका और EU का रूस के साथ व्यापार ऐसी किसी अनिवार्यता पर आधारित नहीं है।

भारत की रणनीति
ट्रम्प की धमकी के बाद भारत ने अमेरिका से तेल आयात बढ़ाया है, जिसमें अप्रैल-जून 2025 तिमाही में 114% की वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा, भारत ने 37 जरूरी दवाओं की कीमतों में 10-15% की कटौती की है, ताकि उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ कम हो। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक कार्यक्रम में कहा, “वैश्विक व्यवस्था अब एक देश के दबदबे की नहीं रही। भारत अपनी संप्रभुता और हितों की रक्षा के लिए दृढ़ है।

थार में उर्वरक आयात का संदर्भ
हालांकि, ट्रम्प ने भारत के रूस से उर्वरक आयात का विशेष रूप से उल्लेख नहीं किया, भारत ने अपनी प्रतिक्रिया में बताया कि अमेरिका और EU भी रूस से उर्वरक आयात करते हैं। यह भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि थार जैसे क्षेत्रों में कृषि के लिए उर्वरक आवश्यक हैं। रूस से उर्वरक आयात भारत की खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादकता के लिए अहम है, और इसे रोकना स्थानीय किसानों के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।

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