पटना: सरकार ने मरीजों को बेहतर इलाज देने का वादा किया था और पटना जिले के दनियावां, पुनपुन और दुल्हिन बाजार में इसके लिए नए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भी बनवा दिए। इन भवनों का उद्घाटन भी हो चुका है, लेकिन मरीजों की उम्मीदों पर तब पानी फिर गया जब उन्हें पता चला कि पुराने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को अभी तक यहां शिफ्ट नहीं किया गया है। प्रभारियों की लापरवाही के कारण ये मरीज आज भी पुरानी, सीमित सुविधाओं पर ही निर्भर हैं।
जानकारी के अनुसार, ये भवन चार महीने पहले ही बनकर तैयार हो गए थे। इन अस्पतालों में बेड, एक्सरे-ईसीजी मशीन और जेनरेटर जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं भी लगा दी गई हैं। बावजूद इसके, ये एक सामुदायिक अस्पताल के रूप में पूरी तरह से काम शुरू नहीं कर पाए हैं।
स्थानांतरण में देरी के कारण
बताया जा रहा है कि इस देरी के पीछे कई कारण हैं:-
1. स्थानीय राजनीतिक दबाव: कुछ इलाकों में स्थानीय नेताओं के दबाव के कारण स्थानांतरण रुका हुआ है।
2. लोगों का विरोध: कुछ स्थानों पर लोगों द्वारा भी इस स्थानांतरण का विरोध किया जा रहा है।
3. चिकित्सकों की कमी: नए और बड़े केंद्रों को चलाने के लिए पर्याप्त संख्या में डॉक्टर और स्टाफ उपलब्ध नहीं हैं।
मरीजों को हो रही है परेशानी
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीएम) विवेक कुमार सिंह ने बताया कि पहले जिले के सभी 23 प्रखंडों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ 6 बेड के होते थे। अब राज्य सरकार ने इन्हें 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तब्दील कर दिया है। यह कदम मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता था, क्योंकि अब गंभीर मरीजों को ही सदर अस्पताल या बड़े अस्पतालों में रेफर करने की जरूरत पड़ती। हालांकि, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के नए भवनों में शिफ्ट न होने के कारण इन इलाकों के मरीज आधुनिक सुविधाओं से वंचित हैं।
जब तक ये केंद्र पूरी तरह से चालू नहीं हो जाते, तब तक मरीजों को पहले की तरह ही सीमित सुविधाओं वाले 6 बेड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ेगा।



