Global South’ पर वर्चस्व चाहता है अमेरिका, रूस का तीखा आरोप

रूस ने अमेरिका पर विकासशील देशों के खिलाफ नव-उपनिवेशवादी नीति अपनाने का आरोप लगाया, और वैश्विक दक्षिण के साथ निष्पक्ष वैश्विक व्यवस्था की मांग की।

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नई दिल्ली: रूस ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह ‘ग्लोबल साउथ’ देशों (Global South Countries) के खिलाफ नव उपनिवेशवादी नीतियां अपना रहा है ताकि दुनिया में अपना वर्चस्व बनाए रख सके। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा (Maria Zakharova) ने अमेरिका की टैरिफ नीति (Trump Tariff Policy) को विकासशील देशों की संप्रभुता पर सीधा हमला करार दिया है।
यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कई देशों पर नए आयात शुल्क लगाने की बात कही थी। रूस का कहना है कि यह कदम आर्थिक दबाव के जरिए राजनीतिक नियंत्रण स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है।

क्या है ग्लोबल साउथ?
ग्लोबल साउथ’ शब्द का प्रयोग उन देशों के लिए किया जाता है, जो आम तौर पर विकासशील, निम्न-आय वाले या उभरती अर्थव्यवस्थाएं माने जाते हैं। इनमें अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के कई देश शामिल हैं।

टैरिफ के जरिए संप्रभुता पर हमला:
जखारोवा ने अमेरिका की टैरिफ नीति को ‘प्रत्यक्ष अतिक्रमण’ बताते हुए कहा कि यह विकासशील देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने जैसा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका एकतरफा प्रतिबंधों और संरक्षणवादी उपायों के जरिए वैश्विक आर्थिक स्थिरता को नुकसान पहुंचा रहा है।

ब्रिक्स का जिक्र:
रूसी प्रवक्ता ने कहा कि रूस ऐसे सभी देशों के साथ सहयोग को तैयार है, जो समानता पर आधारित वैश्विक व्यवस्था चाहते हैं। उन्होंने ब्रिक्स (BRICS) समूह का उदाहरण देते हुए बताया कि भारत, चीन, ब्राजील, रूस और दक्षिण अफ्रीका के अलावा 2024 में इसमें मिस्त्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल हुए हैं, जबकि 2025 में इंडोनेशिया के भी इसमें जुड़ने की संभावना है।

आर्थिक नुकसान का भी आरोप:
जखारोवा ने कहा कि अमेरिका की यह नीति वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर रही है और आर्थिक मंदी को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने पश्चिमी देशों पर यह भी आरोप लगाया कि जो कभी मुक्त व्यापार का समर्थन करते थे, अब वही अपने राजनीतिक हितों के लिए टैरिफ जैसी बाधाएं खड़ी कर रहे हैं।
रूस का यह तीखा बयान अमेरिका की नीतियों पर वैश्विक असहमति को उजागर करता है। खासकर उन देशों के बीच, जो अब वैश्विक शक्ति संतुलन को बहुपक्षीय और समानता आधारित बनाना चाहते हैं।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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