नई दिल्ली: जैसा भोजन वैसा मन व तन। जी हां! आप पौष्टिक खाना खाएंगे तो हष्ट-पुष्ट दिखेंगे। अंदर से एनर्जेटिक भी महसूस करेंगे और आपका मिजाज भी खुश रहेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) आयुर्वेद आहार उत्पादों की लिस्ट जारी की है। इसमें कौन-सी चीज की मात्रा कितनी होनी चाहिए। कैसे बनाना चाहिए सारी जानकारी दी गई। FSSAI ने इस सूची को आयुष मंत्रालय की सलाह पर तैयार किया है। इसमें अनुसूची ‘ए’ में सूचीबद्ध प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों का संदर्भ लिया गया है।
ये फायदे होंगे
आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने आयुर्वेद आहार को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने का आग्रह किया, ताकि इसके दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभों का अनुभव किया जा सके। उन्होंने कहा कि ये आहार पद्धतियां न केवल शरीर को पोषण देती हैं बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करती हैं। पाचन में सहायता करती हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में आयुर्वेद आहार को अपनाना निवारक स्वास्थ्य सेवा और एक संतुलित, सतत जीवन शैली की दिशा में एक अर्थपूर्ण कदम है आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि यह पहल न केवल खाद्य व्यवसाय संचालकों को आवश्यक स्पष्टता प्रदान करती है बल्कि आयुर्वेद-आधारित पोषण में उपभोक्ताओं के विश्वास को भी मजबूत करती है।
आयुर्वेद आहार का मतलब
आयुर्वेद के समग्र आहार सिद्धांतों के अनुरूप विकसित खाद्य उत्पाद जो स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़ी दुनिया की सबसे पुरानी प्रणालियों में से एक है। ये व्यंजन संतुलन, मौसमी उपयुक्तता और प्राकृतिक सामग्री और जड़ी-बूटियों के उपयोग पर जोर देते हैं। प्राकृतिक सामग्री और जड़ी-बूटियां अपने चिकित्सीय लाभों के लिए जानी जाती हैं। लोगों की निवारक स्वास्थ्य और सतत जीवन शैली में बढ़ती रुचि के साथ आयुर्वेद आहार को एक विश्वसनीय पोषण विकल्प के रूप में तेज़ी से मान्यता मिल रही है, जो परंपरा और आधुनिक आहार संबंधी आदतों में सामंजस्य स्थापित करता है।
आयुर्वेदिक आहार कैसे काम करता है?
आयुर्वेद में आपका प्रमुख दोष यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है कि आपके आहार को संतुलित और सर्वोत्तम स्वास्थ्य के लिए कैसे तैयार किया जाए। ऐसा माना जाता है कि प्रत्येक दोष विशिष्ट शारीरिक कार्यों को प्रभावित करता है। वात अपचय, या पदार्थों के विघटन को नियंत्रित करता है, और वात प्रधानता वाले व्यक्तियों का शरीर प्रायः दुबला या नाजुक होता है। पित्त, जो चयापचय का नियंत्रण करता है, तीव्र भूख और स्वाभाविक रूप से मांसपेशियों के निर्माण से जुड़ा हुआ है। कफ, उपचय से जुड़ा है, जो ऊतकों के निर्माण और मरम्मत की प्रक्रिया है, यह धीमी चयापचय से जुड़ा है, और कफ-प्रधान लोगों को बड़े या मजबूत शरीर वाला बताया गया है।
सूची में दी गई रेसीपी
कुलमाशा (Kulmasha): इस शब्द मतलब ‘आधा पका हुआ जौ’ होता है। यह प्राचीन कश्मीर में एक लोकप्रिय आहार था। इसका उल्लेख नीलमतपुराण में है। पुराणों में कुलमाशा को देवताओं के लिए भोग और ब्राह्मणों के लिए दान के रूप में अनुशंसित किया गया है।
लप्सिका (Lapfsika): एक भारतीय मिठाई है जो आमतौर पर “लापसी” (Laapsi) के नाम से जानी जाती है। यह एक लोकप्रिय उत्तर भारतीय व्यंजन है जो गेहूं के आटे या टूटे हुए गेहूं से बनाया जाता है, जिसे घी, दूध, मेवे और सूखे मेवों के साथ पकाया जाता है। लापसी अक्सर धार्मिक समारोहों और प्रसाद के रूप में भी बनाई जाती है।
मांथा (Mattha): इसे छाछ (बटरमिल्क) से बनाया जाता है और इसमें फल मिलाने से यह एक स्वादिष्ट और पौष्टिक पेय बन जाता है। इसे ‘फ्रूट-बेस्ड मट्ठा’ भी कहा जा सकता है। इसके अलावा इडली और कढ़ी की भी रेसीपी जारी की गई है।
यहां मिलेगी पूरी लिस्ट
Food Safety and Standards Authority of India ने जो आहार लिस्ट जारी की है, उसे आप ऑनलाइन भी देख सकते हैं। इसमें बकायदा रेसीपी बताई गई है। ऐसे में आप भी कोई व्यंजन बनाना चाहते हैं। इसे देखकर बना सकते हैं। आयुर्वेद आहार की सूची इस लिंक के माध्यम से देखी जा सकती है।



