Pakistan में तेल की खोज: दावे हवा में हकीकत दूर

2019 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने दावा किया था कि कराची से 230-280 किलोमीटर दूर समुद्र में, ईरान की सीमा के पास, केकरा-1 ब्लॉक में इतना बड़ा तेल और गैस भंडार मिलने वाला है।

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नई दिल्ली: पाकिस्तान (Pakistan) में तेल और गैस के विशाल भंडारों की खोज की खबरें बार-बार सुर्खियां बनती हैं, लेकिन हर बार ये दावे खोखले साबित होते हैं। हाल ही में फिर से समुद्री क्षेत्र में भारी तेल और गैस भंडार मिलने की चर्चा ने जोर पकड़ा, मगर विशेषज्ञों ने इन दावों को संदिग्ध बताया है। आइए, इस मामले की सच्चाई को समझते हैं।

इमरान खान के समय का शोर
2019 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने दावा किया था कि कराची से 230-280 किलोमीटर दूर समुद्र में, ईरान की सीमा के पास, केकरा-1 ब्लॉक में इतना बड़ा तेल और गैस भंडार मिलने वाला है कि यह पाकिस्तान की आर्थिक तस्वीर बदल देगा। उन्होंने इसे देश के लिए गेम-चेंजर बताते हुए जनता से दुआएं मांगी थीं। अमेरिकी कंपनी एक्सॉनमोबिल और इटली की ईएनआई इस क्षेत्र में ड्रिलिंग कर रही थीं। हालांकि, जल्द ही पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 5500 मीटर की खुदाई के बाद भी कोई तेल या गैस नहीं मिला, सिर्फ पानी निकला। इस परियोजना पर 124 अरब डॉलर खर्च हुए, लेकिन सफलता की संभावना केवल 12% थी। इस असफलता ने इमरान खान की व्यापक आलोचना कराई, क्योंकि उनके दावों को प्रचार और आर्थिक संकट से ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया गया।

2024 में फिर उठी हवा
सितंबर 2024 में पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया कि समुद्री क्षेत्र में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल और गैस भंडार मिला है, जिसे ‘नीला खजाना’ नाम दिया गया। यह खोज कथित तौर पर तीन साल के भौगोलिक सर्वे और एक सहयोगी देश की मदद से हुई। मगर विशेषज्ञों ने इन दावों पर सवाल उठाए। ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी के पूर्व सदस्य मुहम्मद आरिफ के अनुसार, भंडार की मात्रा और व्यावसायिक उपयोगिता अभी अस्पष्ट है। समुद्र से तेल निकालने में 4-5 साल और 5 अरब डॉलर से अधिक निवेश की जरूरत है। गहरे समुद्र में ड्रिलिंग की जटिलता और लागत के कारण तत्काल राहत की संभावना कम है।

ट्रंप का दावा और मजाक
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान के ‘विशाल तेल भंडार’ को विकसित करने में मदद करेगा, और शायद एक दिन पाकिस्तान भारत को भी तेल बेचे। इस बयान ने पाकिस्तान में हलचल मचा दी, लेकिन सोशल मीडिया पर इसका मजाक उड़ा। यूजर्स ने इसे ‘कॉमेडी’ करार देते हुए कहा कि ये दावे पुराने और आधारहीन हैं। कुछ ने चुटकी ली कि शायद पाकिस्तान ईरानी तेल को अपना बताकर बेचने की सोच रहा है।

पाकिस्तान के तेल भंडार की हकीकत
आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान का तेल भंडार वैश्विक स्तर पर नगण्य है। 2016 में इसका अनुमानित भंडार 35.35 करोड़ बैरल था, जो वैश्विक भंडार का मात्र 0.021% है। तुलनात्मक रूप से, भारत के पास 4.8 अरब बैरल तेल और 1149 अरब क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस है। 2025 में पाकिस्तान का दैनिक तेल उत्पादन 64,262 बैरल होने का अनुमान है, जो 2019 के 89,030 बैरल से कम है। देश की तेल खपत 5.56 लाख बैरल प्रतिदिन है, जिसमें से 80-85% आयात पर निर्भरता है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में कुछ छोटे भंडार हैं, लेकिन बलूच विद्रोह और सुरक्षा चिंताओं के कारण खनन मुश्किल है।

शेल गैस की संभावना
2015 में अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन ने अनुमान लगाया था कि पाकिस्तान के पास 9.1 अरब बैरल शेल तेल और 105 ट्रिलियन क्यूबिक फीट शेल गैस हो सकती है। लेकिन ये भंडार व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य नहीं हैं और इन्हें निकालने के लिए भारी निवेश और समय चाहिए। अपतटीय अन्वेषण का रिकॉर्ड भी निराशाजनक रहा है, और सुरक्षा जोखिमों के कारण अंतरराष्ट्रीय निवेशक हिचकते हैं।

क्यों उड़ती हैं ऐसी खबरें?
विशेषज्ञों का कहना है कि तेल भंडार की खबरें अक्सर राजनीतिक और आर्थिक दबावों के कारण फैलाई जाती हैं। कर्ज और महंगाई से जूझ रही पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था में ये दावे जनता का ध्यान बटाने और विदेशी निवेशकों को लुभाने का जरिया बनते हैं। हालांकि, बार-बार असफल दावों ने इनकी विश्वसनीयता को कम कर दिया है।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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