नई दिल्ली: सेमीकंडक्टर सेक्टर का लीडर बनने की दिशा में भारत आगे बढ़ रहा है। सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए ₹76,000 करोड़ के कुल लागत के साथ ‘सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम’ को मंजूरी दी है। इसके तहत घरेलू कंपनियों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई को समर्थन देने के लिए ₹1,000 करोड़ के लागत के साथ ‘डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना’ को मंजूरी दी गई है।
डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव योजना क्या है
यह योजना 2021 के दिसंबर में लॉन्च हुई थी। डिजाइनों के प्रारंभिक प्रोटोटाइप में सहायता के लिए इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (ईडीए) उपकरण और बौद्धिक संपदा (आईपी) कोर जैसे डिजाइन को इन्फ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट मुहैया कराना है। इसके तहत डिजाइन प्रोटोटाइपिंग, स्केलिंग-अप और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए पात्र लागत का 50% तक वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है। इसकी जिसकी अधिकतम सीमा ₹15 करोड़ प्रति आवेदन है। चिप समाधानों के परिनियोजन और व्यावसायीकरण के लिए पांच वर्षों में शुद्ध बिक्री कारोबार का 6% से 4% तक प्रोत्साहन मुहैया कराना है। इसकी अधिकतम सीमा ₹30 करोड़ प्रति आवेदन है।
योजना के तहत अब तक क्या-क्या हुआ
- 278 शैक्षणिक संस्थानों (सी2एस) और 72 स्टार्टअप्स (डीएलआई) को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन ऑटोमेशन (ईडीए) उपकरणों तक पहुँच की मंजूरी दी गई है।
- 23 फर्मों और स्टार्टअप्स को निगरानी कैमरा, ऊर्जा मीटर, माइक्रोप्रोसेसर आईपी, नेटवर्किंग अनुप्रयोगों आदि के लिए चिप्स डिजाइन करने हेतु वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है।
- इनमें से दस कंपनियों ने व्यावसायीकरण हेतु अपने डिजाइन प्रोटोटाइप का विस्तार करने हेतु उद्यम पूंजी (वीसी) निधि जुटाई है।
- छह कंपनियों ने विभिन्न सेमीकंडक्टर फाउंड्रीज में प्रोटोटाइप टेप-आउट पूरा कर लिया है।
17 संस्थानों ने 20 चिप डिजाइनों का निर्माण किया
हाल ही में एससीएल मोहाली की ओर से 17 शैक्षणिक संस्थानों के 20 चिप डिजाइनों का सफलतापूर्वक निर्माण किया गया है। ईडीए उपकरणों की लागत सहित कुल ₹803.08 करोड़ के परियोजना लागत को मंजूरी दी गई है। ये परियोजनाएं सेमीकंडक्टर डिजाइन और विकास के विभिन्न चरणों में हैं। इस योजना के तहत धनराशि जारी करना चिप्स की तैनाती सहित निर्धारित लक्ष्यों से जुड़ा है। डीएलआई योजना हितधारकों और लाभार्थी कंपनियों के साथ गहन परामर्श से कार्यान्वित की जाती है। किसी भी आवश्यक संशोधन को उभरती आवश्यकताओं और प्रतिक्रिया के आधार पर किया जाएगा।



