Pak में दिखी मजहबी असहिष्णुता, Punjab में अहमदिया मस्जिद और कब्रें ध्वस्त

पाकिस्तान में धार्मिक असहिष्णुता के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में अहमदिया समुदाय की एक पुरानी मस्जिद को आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया।

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नई दिल्ली: पाकिस्तान के (Pakistan) पंजाब प्रांत में अल्पसंख्यक अहमदिया समुदाय के साथ एक और बड़ा धार्मिक भेदभाव सामने आया है। मंगलवार को गुजरांवाला जिले (Gujranwala) में स्थित एक 70 साल पुरानी अहमदिया मस्जिद (Ahmadiyya Mosque Demolition) को स्थानीय पुलिस ने ध्वस्त कर दिया। इसके साथ ही दो अहमदिया कब्रों को भी क्षतिग्रस्त किया गया, जिसके बाद इस समुदाय में गहरा रोष फैल गया है।
घटना की पुष्टि जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान (Jamaat-e-Ahmadiyya Pakistan – जेएपी) ने की है। संगठन के मुताबिक, धार्मिक चरमपंथियों के दबाव में आकर पुलिस ने न सिर्फ मस्जिद के मेहराब को गिराया, बल्कि कब्रों पर लगे पत्थर तोड़कर उन्हें अपवित्र भी कर दिया। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव के मामलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की आलोचना हो रही है।

जेएपी ने की कार्रवाई की निंदा
जेएपी के प्रवक्ता अमीर महमूद (Amir Mahmood) ने इस पूरे घटनाक्रम की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह न सिर्फ धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है, बल्कि पाकिस्तान के संविधान के मूल सिद्धांतों पर भी हमला है। महमूद के अनुसार, “यह पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करे, फिर चाहे उनकी आस्था कुछ भी क्यों न हो। मस्जिद गिराना और कब्रों का अपमान करना न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि गैरकानूनी भी है।”
उन्होंने मांग की कि इस घटना के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और अहमदिया समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वालों को जवाबदेह ठहराया जाए।

पुलिस ने दी सफाई
दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि मस्जिद और कब्रों पर इस्लामी आयतें लिखी हुई थीं, और चूंकि पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय को मुस्लिम नहीं माना जाता, इसलिए उन्हें इन प्रतीकों का इस्तेमाल करने से मना किया गया था। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, “हमने सिर्फ कानून का पालन किया है और समुदाय को पहले ही सूचित किया गया था।”

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठ सकते हैं सवाल
यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर पहले ही सवाल खड़े हो रहे हैं। खासतौर पर अहमदिया समुदाय, जिसे 1974 में पाकिस्तान के संविधान के तहत गैर-मुस्लिम घोषित किया गया था, लगातार उत्पीड़न और भेदभाव का सामना कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने पहले भी पाकिस्तान सरकार से इस समुदाय की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। अब देखना यह होगा कि क्या इस घटना पर सरकार कोई कार्रवाई करती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह अनदेखा कर दिया जाएगा। फिलहाल अहमदिया समुदाय में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

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