बिहार चुनाव: लालू के बड़े लाल के बदले रुख के ‘कमाल’ पर नजर

चुनावी साल में बिहार में का सियासी परिदृश्य जिस तरह बदल रहा है, उसमें सबकी नजर राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के सियासी मूव पर है।

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नई दिल्ली: पार्टी से निष्कासन के बाद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव का रुख अचानक बदल गया है। पहले उन्होंने पार्टी की परंपरागत हरी टोपी से दूरी बनाते हुए पीली टोपी पहनी, फिर पार्टी के नेतृत्व को विधायक भाई वीरेंद्र के खिलाफ दलित के अपमान के मामले में कार्रवाई की चुनौती दी। एक कड़ी में एक कदम और बढ़ाते हुए उन्होंने महुआ विधानसभा सीट से बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। जाहिर तौर पर विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तेजप्रताप के नए और हमलावर रुख से सियासी खेमे में हलचल है। सवाल पूछा जा रहा है कि क्या तेज प्रताप अपनी पार्टी का गठन करेंगे? जाहिर तौर पर अगर ऐसा हुआ तो सीमित क्षेत्रों में ही सही मगर यह राजद के माय (यादव-मुस्लिम) समीकरण के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
सवाल यह है कि तेज प्रताप के रुख में अचानक आक्रामकता क्यों आ गई? जानकारों का कहना है कि एक तो अहम मुद्दों पर तेज प्रताप की अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव से नहीं बन रही थी। दूसरा तेज प्रताप को लगता था कि चुनाव आते-आते पार्टी से उनका निष्कासन खत्म हो जाएगा। हालांकि, जब ऐसी परिस्थिति बनती नहीं दिखी तो तेज प्रताप ने सीधा मोर्चा खोलने का मन बनाया। और यह उनके राजनीतिक करियर के लिए जरूरी भी था। वह इसलिए कि घर वापसी नहीं होने के मतलब उन्हें राजद से टिकट नहीं मिलना था। ऐसे में उनका सियासी करियर भंवर में फंसना तय था।
दूसरी ओर तेज प्रताप के लिए नरमी नहीं जताने के मामले में लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी की अपनी मजबूरी है। वह इसलिए कि तेज प्रताप की पत्नी, जिनसे उनका तलाक का मुकदमा चल रहा है, ने निष्कासन के फैसले को लालू परिवार का नाटक करार दिया था। उन्होंने कहा था कि अंदरखाने सभी एक हैं। अभी दबाव में निष्कासन का फैसला हुआ है। चुनाव से पूर्व फिर तेज प्रताप को टिकट मिलेगा और परिवार में सब-कुछ ठीक ठाक हो जाएगा। अब इन परिस्थितियों में अगर तेज प्रताप का निष्कासन अगर वाकई रद्द हुआ और उन्हें पार्टी से टिकट मिला तो विधानसभा चुनाव में यह एक बड़ा मुद्दा बन जाएगा। जाहिर तौर पर लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी किसी कीमत पर नहीं चाहेंगे कि चुनाव के दौरान पारिवारिक युद्ध मुद्दा बने और इसका लाभ सत्तारूढ़ राजग को मिल जाए।

राजद के लिए आगे कुआं पीछे खाई की स्थिति
नई परिस्थिति ने जहां तेज प्रताप के भविष्य के लिए बड़ी चुनौती खड़ी की है, वहीं राजद के लिए उलझन वाली स्थिति खड़ी कर दी है। तेजप्रताप के सामने अपना राजनीतिक भविष्य बचाने के लिए अपनी ताकत दिखाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। वहीं, इस विवाद के निपटारे के लिए राजद के पास तेजप्रताप का निष्कासन रद्द करने का विकल्प नहीं बचा है। हालांकि, यह फैसला महंगा सियासी सौदा साबित हो सकता है। राजद अगर तेज प्रताप के साथ संतुलन नहीं बैठा पाए तो चुनाव के दौरान तेजस्वी बनाम तेज प्रताप जंग की धारणा भी बन सकती है। फिर, यह ठीक चुनाव के दौरान राजद को इस पारिवारिक जंग का रूप ले सकती है।

तेज प्रताप यादव पटना स्थित अपने आवास पर धर्मनिरपेक्ष सेवक संघ (DSS) की बैठक करते हुए।

कैसे बदलती गई राजनीतिक परिस्थिति
विवाद के शुुरुआत तेज प्रताप के सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट से हुई। इसमें तेज प्रताप एक महिला के साथ दिखे। कहा गया कि दोनों 12 साल से रिलेशनशिप में हैं। पोस्ट से उठे सियासी बवंडर के बीच हालात संभालने के लिए लालू प्रसाद ने यह कह कर तेज प्रताप को पार्टी से निष्कासित कर दिया कि निजी जीवन में नैतिक मूल्यों की अनदेखी सामाजिक न्याय के हमारे सामूहिक संघर्ष को कमजोर करती है। उनके बड़े बेटे का आचरण पारिवारिक मूल्यों और परंपराओं के अनुरूप नहीं था। इसके बाद तेज प्रताप के तेवर ढीले पड़े।
निष्कासन के तुरंत बाद, तेज प्रताप ने भावुक लहजे में सार्वजनिक रूप से अपने माता-पिता से समर्थन की अपील की थी। उन्होंने लिखा था -मेरे प्यारे मम्मी और पापा, मुझे बस आपके भरोसे और प्यार की जरूरत है, और कुछ नहीं, पापा, आप न होते तो न तो यह पार्टी होती और न ही मेरे आस-पास की राजनीति में ये लालची, विश्वासघाती लोग। मैं बस यही चाहता हूं कि आप दोनों हमेशा स्वस्थ और खुश रहें।
एक अन्य पोस्ट में तेजप्रताप ने खुद की तुलना कृष्ण से की थी और अपने छोटे भाई तेजस्वी को अर्जुन कहकर उन्हें पार्टी के भीतर षड्यंत्रकारियों से सावधान रहने की सलाह दी थी। हालांकि, अब उनके सुर बदल गए हैं। वही तेजप्रताप अब कहते हैं कि जो लोग मेरी चुप्पी को कमजोरी समझते हैं, वे यह न सोचें कि मैं आपकी साजिशों से अनजान हूं.. मेरी भूमिका कोई पार्टी या परिवार तय नहीं करेगा। यह जनता और सुप्रीम कोर्ट तय करेगा। इसके बाद तेज प्रताप के लालू और तेजस्वी के करीबी विधायक भाई वीरेंद्र के खिलाफ कार्रवाई की चुनौती दी।

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