ऑपरेशन महादेव: मास्टरमाइंड मूसा समेत तीन आतंकी ढेर, कामयाबी बड़ी

पहलगाम नरसंहार के तीन आतंकी हाशिम मूसा, जिब्रान और हमजा अफगानी की पहचान हुई। ये लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे। सेना ने सैटेलाइट फोन से लोकेशन ट्रैक की।

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जम्मू कश्मीर: ऑपरेशन महादेव के तहत श्रीनगर के लिडवास इलाके में तीन आतंकियों को मार गिराया गया, जिनमें पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड हाशिम मूसा (जिसे सुलैमान शाह भी कहते हैं) भी शामिल था। इस ऑपरेशन को अंजाम देने में 24 राष्ट्रीय राइफल्स, 4 पैरा, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व रिजर्व पुलिस बल जैसी जांबाज एजेंसियों ने मिलकर अंजाम दिया है। 
ऑपरेशन के संबंध में सेना की चिनार कॉर्प्स ने अपने एक्स हैंडल पर जानकारी साझा की। एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, ऑपरेशन महादेव लिडवास इलाके में आतंकियों से संपर्क स्थापित हुआ है और ऑपरेशन जारी है। इसके कुछ समय बाद एक अन्य पोस्ट में चिनार कॉर्प्स ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान तीन आतंकियों को ढेर कर दिया गया है और ऑपरेशन अभी भी जारी है।
सेना के अधिकारियों के अनुसार, खुफिया सूचना के आधार पर लिडवास इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया था। इस दौरान सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई, जो कई घंटों तक चली। मुठभेड़ में तीन आतंकियों को मार गिराने में सुरक्षाबलों को सफलता मिली। इलाके में फिलहाल सर्च ऑपरेशन जारी है।
‘ऑपरेशन महादेव’ को हाल के समय में घाटी में आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है। यह ऑपरेशन इस बात का संकेत है कि सेना और अन्य सुरक्षाबल आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने के लिए पूरी मुस्तैदी और सटीक रणनीति के साथ जुटे हुए हैं।
22 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन मैदान में पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों द्वारा किए गए आतंकवादी हमले, जिसमें 26 लोग मारे गए थे, के बाद से आतंकवाद-रोधी अभियान आतंकवादियों के नापाक मंसूबों को विफल करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक और मानव खुफिया जानकारी का उपयोग कर रहे हैं।

96 दिन से छिपे थे आतंकी
पहलगाम अटैक के बाद घाटी में सुरक्षा बड़ा दी गई थी। कदम कदम पर तलाश की जा रही थी, फिर भी आतंकी 96 दिनों तक छिपने में कामयाब रहे। तो अब ऐसा क्या हुआ कि जो आतंकी इतने दिनों तक छिपे थे, उन्हें तलाश लिया गया। 
सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, फिजिकल और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस से तलाश की जा रही थी। ड्रोन, थर्मल इमेजिंग और ह्यूमन खुफिया नेटवर्क के जरिए आतंकियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। इसी दौरान एक चौंकाने वाला सुराग मिला, घने जंग में एक चाइनीज अल्ट्रा रेडियो कम्युनिकेशन सिस्टम एक्टवि हुआ, इसी के जरिये लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी एनक्रिप्टेड मैसेज से आपस में बात कर रहे थे। सेना को समझ आ गया कि आतंकी कहां छिपे हैं और फिर शुरू हुआ ‘ऑपरेशन महादेव’।

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