Make in India और Make For the World, पूरी दुनिया में रेलवे पार्ट्स का डंका

भारत में बने रेलवे पार्ट्स की मांग पूरी दुनिया में है। इससे विदेशी मुद्रा आने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार को भी सृजन हो रहा है।

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नई दिल्ली: भारत में बनने वाले रेलवे पार्ट्स की मांग ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी समेत दुनिया के कई देशों में है। इससे भारत का मेक इन इंडिया अब मेक फॉर वर्ल्ड भी बन गया है। ये पार्ट्स गुजरात के वडोदरा में लगे सावली संयंत्र में बनते हैं। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को रेलवे वाहनों के निर्माण के प्रमुख केंद्र सावली संयंत्र का दौरा किया। संयंत्र में एल्सटॉम के संचालन की समीक्षा की।

तरक्की की सीढ़ी

  • सावली इकाई ने जर्मनी, मिस्र, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील सहित कई देशों को 3,800 से ज्यादा बोगियों का सफलतापूर्वक निर्यात किया है।
  • वियना, ऑस्ट्रिया को 4,000 से ज्यादा फ्लैटपैक (मॉड्यूल) भी उपलब्ध कराए हैं। 
  • मनेजा इकाई ने विभिन्न वैश्विक परियोजनाओं को 5,000 से ज्यादा संचालन शक्ति प्रणालियां निर्यात करके महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
  • भारत वर्तमान में 27 अंतरराष्ट्रीय सिग्नलिंग परियोजनाओं का नेतृत्व कर रहा है और दुनिया भर में 40 अतिरिक्त परियोजनाओं को सहायता प्रदान कर रहा है।
  • बैंगलोर का डिजिटल एक्सपीरियंस सेंटर दुनिया भर में 120 से अधिक परियोजनाओं में सहयोग करके नवाचार को बढ़ावा दे रहा है, और आईओटी, एआई ब्लॉकचेन और साइबर सुरक्षा का उपयोग करके अगली पीढ़ी की सिग्नलिंग पर ध्यान केन्‍द्रित कर रहा है।

किस देश में किसकी मांग

  • मेट्रो कोच: ऑस्ट्रेलिया, कनाडा को निर्यात किए गए
  • बोगियां: यूके, सऊदी अरब, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया भेजी गईं
  • संचालक शक्ति प्रणालियां: फ्रांस, मैक्सिको, रोमानिया, स्पेन, जर्मनी और इटली को आपूर्ति की गई
  • यात्री कोच: मोजाम्बिक, बांग्लादेश और श्रीलंका को वितरित
  • रेल के इंजन: मोजाम्बिक, सेनेगल, श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश और गिनी गणराज्य को निर्यात किए गए

स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

संयंत्र के बारे में: संयंत्र सरकार की मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के तहत नियमित लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों के लिए अत्याधुनिक और ट्रांजिट ट्रेन कारों का उत्पादन कर रहा है। भारत के 3,400 से अधिक इंजीनियर दुनिया भर में 21 एल्सटॉम संयंत्रों के साथ सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं। सावली में 450 रेल कारों का निर्माण किया गया और क्वींसलैंड मेट्रो परियोजना के लिए ऑस्ट्रेलिया को निर्यात किया गया।
मंत्री ने कहा कि मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड पहल का प्रभाव भारतीय रेलवे के विनिर्माण क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कई देशों को रेलवे के कलपुर्जों का निर्यात भारत में रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर रहा है।

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