ICJ का फैसला, Climate Change के लिए देश होंगे कानूनी रूप से जिम्मेदार

अदालत ने स्पष्ट किया कि देशों को अपने ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन के लिए कानूनी रूप से जवाबदेह ठहराया जा सकता है, क्योंकि ये उत्सर्जन जलवायु प्रणाली और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं।

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नई दिल्ली: हेग में स्थित संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च न्यायिक संस्था, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे), ने 23 जुलाई 2025 को एक अभूतपूर्व परामर्शी राय जारी की, जिसमें कहा गया कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियां और गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध हैं।

अदालत ने स्पष्ट किया कि देशों को अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लिए कानूनी रूप से जवाबदेह ठहराया जा सकता है, क्योंकि ये उत्सर्जन जलवायु प्रणाली और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। यह निर्णय जलवायु संकट से निपटने के लिए वैश्विक प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

परामर्शी राय का महत्व
यह परामर्शी राय संयुक्त राष्ट्र महासभा के 2023 में अनुरोध के जवाब में दी गई है, जिसमें जलवायु परिवर्तन से संबंधित राज्यों के कानूनी दायित्वों और उनके कार्यों या चूकों के परिणामों पर स्पष्टता मांगी गई थी। हालांकि यह राय कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, विशेषज्ञ इसे “ऐतिहासिक” मानते हैं, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जलवायु कार्रवाई की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी को रेखांकित करता है।

  • इस पहल की शुरुआत प्रशांत क्षेत्र के छोटे द्वीपीय देशों और युवा कार्यकर्ताओं ने की थी, जिन्हें वैश्विक नागरिक समाज और कुछ देशों का समर्थन प्राप्त हुआ। जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक संकट है जो ग्रह पर जीवन के हर रूप को प्रभावित करता है। यह राय जलवायु कार्रवाई को दिशा देने और नीतियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। न्यायाधीश हिरोशी ताकाहाशी, आईसीजे

वैश्विक जलवायु वार्ताओं पर प्रभाव
यह निर्णय ब्राजील के बेलेम में होने वाले आगामी कॉप30 सम्मेलन के लिए एक महत्वपूर्ण आधार तैयार करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह राय वैश्विक जलवायु वार्ताओं को नई गति देगी, जो हाल ही में बॉन सम्मेलन और कुछ देशों की जलवायु-विरोधी नीतियों के कारण गति खो चुकी थीं। भारत जैसे देश, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से सबसे अधिक प्रभावित हैं, और दक्षिण एशिया के अन्य देशों को इस निर्णय से वार्ताओं में मजबूत तर्क मिलेंगे।

आईसीजे ने अपनी राय में निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया

  • राज्यों के दायित्व: अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत देशों का यह कर्तव्य है कि वे मानवजनित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करें और जलवायु प्रणाली की रक्षा करें।
  • पर्यावरण और मानवाधिकार: जलवायु परिवर्तन मानवाधिकारों को प्रभावित करता है, और देशों को पर्यावरण की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
  • छोटे द्वीपीय देशों पर प्रभाव: ये देश जलवायु परिवर्तन के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं, और उनके नुकसान के लिए जिम्मेदार देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
  • पेरिस समझौता और अन्य संधियां: पेरिस समझौते के तहत वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने और यूएनएफसीसीसी, वियना कन्वेंशन, और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल जैसे समझौतों के तहत दायित्वों का पालन अनिवार्य है।

राय का आधार
आईसीजे ने यह राय 91 लिखित प्रस्तुतियों, 62 टिप्पणियों, और दिसंबर 2024 में आयोजित सार्वजनिक सुनवाइयों में 96 देशों और 11 अंतरराष्ट्रीय संगठनों की मौखिक प्रस्तुतियों के आधार पर दी। यह निर्णय सर्वसम्मति से पारित किया गया, जो इसकी व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है। अदालत ने कहा कि जलवायु परिवर्तन को कम करने में विफलता को अंतरराष्ट्रीय गलत कृत्य माना जा सकता है, जो राज्यों की जिम्मेदारी को जन्म देता है।

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

  • यह राय दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्रों के लिए एक जीत है, जो जलवायु परिवर्तन के सबसे बड़े शिकार हैं। यह कॉप30 में कमजोर देशों को मजबूत करेगा। ….नादिया अहमद, क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क, दक्षिण एशिया
  • यह परामर्शी राय भले ही बाध्यकारी न हो, लेकिन यह जलवायु नीतियों को अवैध घोषित करने की शक्ति रखती है। इसका प्रभाव राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महसूस किया जाएगा। …राहुल वर्मा, पर्यावरण वकील
  • हमारी पीढ़ी ने इस संकट को दुनिया की सबसे बड़ी अदालत तक ले जाकर एक मजबूत संदेश दिया है कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कार्रवाई अब टाली नहीं जा सकती। ….सारा खान, युवा जलवायु कार्यकर्ता, बांग्लादेश

भविष्य की दिशा
यह निर्णय जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई को तेज करने और नीतियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह राय न केवल कॉप30 बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत बदलावों को भी प्रेरित करेगी। भारत जैसे देशों को अब अपनी जलवायु नीतियों को और सख्त करने और उत्सर्जन कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। यह निर्णय जलवायु संकट से प्रभावित समुदायों और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है।

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