AI में भारत का दबदबा, नीतियां साफ, चुनौतियों से लड़ने की तैयारी

भारत को एआई के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनाना है। इसके लिए सरकार ने पिछले साल मार्च में भारत एआई मिशन शुरू किया था। AI पर सबसे ज्यादा भरोसा भारतीयों को है।

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नई दिल्ली: कोई पहल या कुछ इजाद करने से ज्यादा जरूरी उसका सही इंप्लिमेंटेशन (क्रियान्वयन) होता है। खासकर जब साइंस की बात हो। इसमें सही नीति निर्धारण उतनी ही अहम हो जाती है, जितनी जन्म के बाद बच्चे की परवरिश। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ फिलवक्त भारत यही कर रहा है। एआई के विकास के साथ-साथ उसकी दिशा और दशा दोनों तय हो रही है।

दरअसल, डिजिटल पर जितनी निर्भरता बढ़ रही है उतनी ही साइबर क्राइम हो रहे हैं। साइबर अपराधी इसमें एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत अमेरिका और चीन की तरह भले ही एआई प्लेटफॉर्म विकसित न कर पाया हो लेकिन इसके मिसयूज पर लगाम लगाने और इसके सही इस्तेमाल की तैयारी पूरी कर रहा है। इसी वजह से देश इस क्षेत्र में अलग ही दबदबा है। भारत सरकार ने निजी क्षेत्र और शिक्षा जगत के साथ मिलकर उत्कृष्टता केंद्र बनाया है। लोकसभा में एक सवाल के जवाब में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने भी कहा कि भारत की एआई रणनीति का लक्ष्य प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण, स्थानीय चुनौतियों का समाधान, रोजगार सृजन और राष्ट्र को वैश्विक स्तर पर एआई के क्षेत्र में अग्रणी के रूप में स्थापित करना है। 

एआई मिशन
भारत को एआई के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनाना है। इसके लिए सरकार ने पिछले साल मार्च में भारत एआई मिशन शुरू किया था। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सीडीएसी-पुणे द्वारा प्रबंधित ऐरावत कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर पर ओपन-सोर्स एआई मॉडल होस्ट करने की प्रक्रिया में है। वर्तमान में एलएलएएमए परिवार के तीन ओपन-सोर्स मॉडल तैनात किए जा चुके हैं और डेवलपर समुदाय के लिए एपीआई के माध्यम से शुल्क का भुगतान करने पर उपलब्ध हैं।

कानूनी पहरा

  • धारा-66सी (पहचान की चोरी के लिए सजा) गलत सूचना, डीपफेक, छद्मवेश द्वारा धोखाधड़ी या पहचान की चोरी से संबंधित है।
  • आईटी अधिनियम की धारा-66डी छद्मवेश से धोखाधड़ी के लिए कंप्यूटर संसाधनों के उपयोग को आपराधिक बनाती है।
  • धारा-66ई किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसके निजी क्षेत्र की छवि को कैप्चर करने, प्रकाशित करने या प्रसारित करने के लिए सजा निर्धारित करती है।
  • धारा-67ए और 67बी उदाहरण के लिए अश्लील सामग्री को प्रकाशित या प्रसारित करना दंडनीय अपराध बनाती है, जो डीपफेक तकनीक का उपयोग करके उत्पन्न की जा सकती है।
  • भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 111 किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा संगठित अपराध सिंडिकेट के सदस्य के रूप में या ऐसे सिंडिकेट की ओर से आर्थिक अपराध, साइबर अपराध सहित किसी भी गैरकानूनी गतिविधि को जारी रखने पर दंड देती है।
  • बीएनएस के अंतर्गत कई अन्य धाराएं भी धोखाधड़ी या छद्म रूप में धोखाधड़ी जैसे साइबर अपराधों से निपटती हैं जैसे धारा 318 (धोखाधड़ी), 319 (छद्म रूप में धोखाधड़ी), 353 (सार्वजनिक शरारत), 356 (मानहानि)।
  • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 डेटा फिड्युशरीज़ पर डिजिटल व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा करने का दायित्व डालता है, उन्हें जवाबदेह बनाता है, साथ ही डेटा प्रिंसिपल्स के अधिकारों और कर्तव्यों को भी सुनिश्चित करता है।

इंडियन कंप्यूटर इमेरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सीईआरटी-इन)
एआई से होने वाले खतरों से निपटने के लिए मई 2023 में सलाह प्रकाशित की गई। पिछले साल सितंबर में सीईआरटी-इन और एसआईएसए ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (सीएसपीएआई) कार्यक्रम में प्रमाणित सुरक्षा पेशेवर लॉन्च किया। इस साल मार्च में जनरेटिव एआई समाधानों के प्रभावी और जिम्मेदार उपयोग के लिए सलाह प्रकाशित की गई थी। जुलाई में सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम और क्रिप्टोग्राफी संबंधी आवश्यकताओं के लिए बिल ऑफ मैटेरियल्स (बीओएम ) के लिए तकनीकी निर्देश जारी किए गए। सरकार ने प्रधानमंत्री के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) की अध्यक्षता में भारत-विशिष्ट नियामक एआई ढांचे के लिए एआई पर एडवाइजर ग्रुप बनाया है। इसमें शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार के विभिन्न हितधारकों के सदस्य शामिल हैं।

ये भी जानें

  • हाल ही में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि AI पर सबसे ज्यादा (76 फीसदी) भरोसा भारतीयों को है। यह आंकड़ा दुनिया के औसत 46% से काफी ज्यादा है। 
  • 2030 तक ग्लोबल इकॉनमी में  AI की 19.9 ट्रिलियन डॉलर की हिस्सेदारी होगी। फिलहाल, भारत दुनिया को 16 प्रतिशत एआई टैलेंट दे रहा है।
  • संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट की मानें तो 2023 में एआई में निजी तौर पर निवेश करने में भारत 10वें पायदान पर था। विकासशील देशों भारत और चीन ने ही एआई में निवेश किया है।
  • अमेरिका में सबसे ज्यादा  GitHub डेवलपर हैं। दूसरे नंबर पर भारत और तीसरे पर चीन है। भारत में लगभग 13 मिलियन डेवलपर्स हैं और ब्राजील में चार मिलियन। 
  • G-20 की मेजबानी के बाद भारत ने  AI को वैश्विक विकास और रणनीतिक एजेंडे के रूप में उभारा है।

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