नई दिल्ली: संसद के दोनों सदनों में विपक्षी दल के सदस्यों ने बिहार में SIR समेत दूसरे कुछ मुद्दों पर सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच चल रहा गतिरोध लगातार चौथे दिन भी कायम रहा रहा। लोकसभा एवं राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण कार्यवाही दो बार के स्थगन के बाद दोपहर 2 बजे के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई थी। अब सदन की बैठक शुक्रवार को सुबह 11 बजे शुरू होगी।
इससे पहले सोमवार से बुधवार के पहले तीन दिनों में भी संसद के दोनों सदनों में कामकाज न के बराबर हुआ है। लोकसभा हो या राज्यसभा, दोनों जगह सिर्फ हंगामा देखने को मिल रहा है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफा देने के बाद मंगलवार और बुधवार सदन की कार्यवाही ठीक से नहीं चल पायी थी।
वहीं, गुरुवार को कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा में नियम 56 के तहत एक स्थगन प्रस्ताव पेश किया। इसमें उन्होंने बिहार में मतदाता सूची से 52 लाख से अधिक नामों को कथित तौर पर हटाए जाने पर तत्काल चर्चा की मांग की है। इस मुद्दे पर विपक्षी सांसदों के हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही स्थगित कर दी गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिडला ने कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। वहीं राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी। दोनों सदनों में प्रश्नकाल एवं शून्यकाल सामान्य ढंग से नहीं चल पाए थे।
दो बजे बाद जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी दलों के नेता एसआईआर पर विरोध करने लगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों को अपने सीट पर बैठने के लिए कहा, लेकिन वह नहीं माने और शोर शराबा करते रहे। अध्यक्ष ने इस पर अपनी आपत्ति जताते हुए नाराजगी भी जाहिर की। बाद में हंगामे की वजह से लोकसभा की कार्यवाही को शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया।
इससे पहले लोकसभा और राज्यसभा को बुधवार को भी स्थगित करना पड़ा था। वह इसलिए कि विपक्षी दलों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण सहित अपने मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहे थे। दोनों सदनों में विपक्षी सदस्यों ने बिहार में एसआईआर पर चर्चा की मांग की। इससे दोनों सदनों में कार्यवाही तीन बार स्थगित हुई। पहले दोपहर 12 बजे तक फिर दोपहर 2 बजे तक और आखिर में शेष दिन के लिए स्थगित कर दी गई।
विपक्ष के बढ़ते हमलों के बीच अब भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री भी सामने आ गए हैं और उन्होंने कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। जस तरह से मानसून सत्र की शुरुआत हुई है, उसे देखते हुए सवाल यही है कि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से कब चलेगी।
राजनीतिक जानकार बताते हैं कि अभी जिस तरह के हालात हैं, उसमें विपक्ष के तेवर धीमें पड़ते नहीं दिख रहे हैं। उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद विपक्ष को बैठे-ठाले सरकार पर हमलावर होने का एक और मुद्दा मिल गया है। इस पर विपक्ष मुखर भी है। ऐसे में सत्ता पक्ष के लिए चुनौती है कि सदन की कार्यवाही सुचारू रुप से चलेऔर सार्थक चर्चा शुरू हो।
उज्जवल निकम ने शपथ ली
राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत प्रख्यात वकील उज्ज्वल देवराव निकम ने संसद के उच्च सदन के सदस्य के रूप में शपथ ली।



