भगवान शिव के सन्देशवाहक नंदी को कौन सी वस्तुएं हैं प्रिय

सावन मास भगवान शिव के साथ-साथ नंदी बाबा को भी प्रसन्न करने का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान अगर श्रद्धा से नंदी को प्रिय वस्तुएं अर्पित की जाएं, तो वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं और आपकी मनोकामना को शिवजी तक पहुंचाने में सहायक बनते हैं।

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नई दिल्ली: आमतौर पर लोग हर दिन ही शिव की पूजा-अर्चना करते हैं लेकिन सावन महीने में उनकी पूजा करने से महत्तता और बढ़ जाती है। साथ ही साथ उनके संदेशवाहक नंदी भी उनके भक्तों के प्रिय हैं। सावन का महीना चल रहा है। आईये जानते है कि वह वे कौन सी वस्तुएं हैं, जो नंदी बाबा को अत्यंत प्रिय हैं। सावन में नंदी को प्रसन्न करने के लिए क्या चढ़ाना चाहिए….
हरी घास (दूर्वा घास): नंदी को हरी घास चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह उनकी पसंदीदा चीजों में से एक है। यह समृद्धि और शुभता का प्रतीक है।
चना और गुड़: नंदी को काले चने और गुड़ का भोग लगाने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं। इसे रविवार या सोमवार के दिन चढ़ाना विशेष फलदायक होता है।
तिल और मूंग: भुने हुए तिल और मूंग भी नंदी को चढ़ाए जा सकते हैं। इससे आपकी इच्छाएं पूरी होने का मार्ग प्रशस्त होता है।
 बेलपत्र और जल अर्पण नंदी के ऊपर बेलपत्र और गंगाजल छिड़कना भी फलदायी होता है। यह उनके माध्यम से भगवान शिव को भी प्रिय होता है।
सफेद फूल और माला: नंदी को सफेद फूलों की माला पहनाना शुभ होता है। विशेषकर कुंद, चंपा या चमेली के फूल।

और क्या हैं विशेष उपाय
सावन में हर सोमवार नंदी के दाएं कान में अपनी मनोकामना कहने से पहले उन्हें गुड़ और चना चढ़ाएं, फिर कहें, नंदी बाबा, मेरी बात शिवजी तक पहुंचाना। इसके अलावा, नंदी की पीठ पर हाथ फेरना फलदायक होता है, लेकिन चेहरे या सींग पर नहीं। नंदी के सामने बैठकर शिवलिंग के दर्शन करना विशेष फलदायक माना जाता है।

आखिर नंदी किसके पुत्र हैं और शिव के अत्यंत प्रिय भक्त कैसे बनें:
पुराणों के अनुसार, नंदी का जन्म एक ऋषि शिलाद के तप से हुआ था। ऋषि शिलाद संतान प्राप्ति की इच्छा से कठिन तप कर रहे थे। भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें एक दिव्य बालक प्रदान किया, जिसका नाम उन्होंने नंदी रखा। नंदी बचपन से ही शिवभक्त थे। एक दिन उन्होंने भगवान शिव की घोर तपस्या की और शिवजी उनसे प्रसन्न होकर स्वयं प्रकट हुए।
उन्होंने नंदी को आशीर्वाद दिया: तू मेरा प्रिय गण बनेगा और मेरे वाहन के रूप में मुझे हर स्थान पर ले जाएगा। तभी से नंदी को भगवान शिव का वाहन, द्वारपाल, और संदेशवाहक कहा जाने लगा।

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