फील्ड मार्शल Munir बन सकते पाक के राष्ट्रपति, चल रही तख्तापलट की तैयारी!

राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को हटाने और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के राष्ट्रपति बनने की अटकलों ने जोर पकड़ा था। हालांकि, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इन सभी कयासों को सिरे से खारिज कर दिया है।

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नई दिल्ली: पहलगाम में हुए आतंकी हमले और इसके जवाब में भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की सियासत में भूचाल सा आ गया है। इन घटनाओं के बीच राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को हटाने और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर (Asim Munir) के राष्ट्रपति बनने की अटकलों ने जोर पकड़ा था। हालांकि, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इन सभी कयासों को सिरे से खारिज कर दिया है।

शहबाज शरीफ का बयान, अफवाहें बेबुनियाद
शनिवार को एक निजी समाचार चैनल से बातचीत में शहबाज शरीफ ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति जरदारी को हटाने या सेना प्रमुख असीम मुनीर के राष्ट्रपति बनने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने इन अटकलों को निराधार और खतरनाक अफवाहें करार देते हुए कहा, फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने कभी भी राष्ट्रपति पद की इच्छा जाहिर नहीं की, और न ही ऐसी कोई चर्चा हुई है। शरीफ ने जोर देकर कहा कि उनके, जरदारी और मुनीर के बीच आपसी सम्मान और पाकिस्तान की तरक्की के लिए साझा दृष्टिकोण पर आधारित मजबूत रिश्ता है। उन्होंने इन अफवाहों को देश में अस्थिरता फैलाने की साजिश बताया।

गृह मंत्री नकवी ने भी की निंदा
प्रधानमंत्री के बयान से एक दिन पहले, पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक बयान जारी कर इन अफवाहों की कड़ी निंदा की थी। नकवी ने इसे दुर्भावनापूर्ण प्रचार करार देते हुए कहा, हमें अच्छी तरह पता है कि इस अभियान के पीछे कौन है। न तो राष्ट्रपति जरदारी को इस्तीफा देने के लिए कहा गया है, और न ही सेना प्रमुख की ओर से राष्ट्रपति बनने की कोई मंशा है। उन्होंने विदेशी ताकतों पर इस प्रचार में शामिल होने का आरोप लगाया और कहा, हमारा एकमात्र लक्ष्य पाकिस्तान को मजबूत और स्थिर बनाना है। नकवी ने यह भी रेखांकित किया कि राष्ट्रपति जरदारी और सैन्य नेतृत्व के बीच रिश्ते मजबूत और सम्मानजनक हैं।

जरदारी और शरीफ की सियासी साझेदारी
आसिफ अली जरदारी को पिछले साल एक राजनीतिक समझौते के तहत पांच साल के लिए राष्ट्रपति चुना गया था। इस समझौते में उन्होंने शहबाज शरीफ की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी का समर्थन किया था। जरदारी और उनके बेटे बिलावल भुट्टो जरदारी ने सैन्य और सत्तारूढ़ नेतृत्व के साथ सहयोगात्मक संबंध बनाए रखे हैं। हाल ही में, बिलावल को एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सौंपा गया था, जो भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया तनावों को वैश्विक मंच पर समझाने के लिए विभिन्न देशों का दौरा कर रहा है। यह कदम भुट्टो परिवार के सत्ता के गलियारों में प्रभाव को दर्शाता है।

असीम मुनीर का बढ़ा कार्यकाल
फील्ड मार्शल असीम मुनीर को 2022 में तीन साल के लिए सेना प्रमुख नियुक्त किया गया था, लेकिन पिछले साल सरकार ने उनके कार्यकाल को बढ़ाकर पांच साल कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, भविष्य में उनके कार्यकाल में और विस्तार संभव है। मुनीर की हालिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ मुलाकात ने भी चर्चा बटोरी थी, जिसे कुछ विश्लेषकों ने उनके बढ़ते प्रभाव के संकेत के रूप में देखा। हालांकि, शरीफ और नकवी के बयानों ने इन अटकलों को दबाने की कोशिश की है।

अफवाहों का पृष्ठभूमि और संदर्भ
पहलगाम आतंकी हमले, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे, और इसके जवाब में भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान में सियासी तनाव को बढ़ा दिया। इन घटनाओं के बाद सोशल मीडिया पर अफवाहें उड़ीं कि जरदारी को हटाकर मुनीर राष्ट्रपति बन सकते हैं। कुछ ने इसे 1977 के सैन्य तख्तापलट की तारीख से जोड़कर और सनसनी फैलाई। हालांकि, शरीफ और नकवी ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह विदेशी ताकतों द्वारा प्रायोजित प्रचार है, जिसका मकसद पाकिस्तान की स्थिरता को कमजोर करना है।
पाकिस्तान की सरकार ने राष्ट्रपति जरदारी के इस्तीफे और सेना प्रमुख मुनीर के राष्ट्रपति बनने की अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है। शहबाज शरीफ और मोहसिन नकवी ने एकजुट होकर इन दावों को बेबुनियाद बताया और देश की प्रगति के लिए नेतृत्व की एकता पर जोर दिया। भुट्टो परिवार का सत्ताधारी गठबंधन में महत्वपूर्ण योगदान और सैन्य नेतृत्व के साथ उनके मजबूत रिश्ते इस बात का संकेत हैं कि पाकिस्तान की सियासत में अभी स्थिरता बनी रहेगी। फिर भी, हाल की घटनाओं और अफवाहों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान की राजनीति में उथल-पुथल की संभावना हमेशा बनी रहती है।

Navneet Sharan

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