नई दिल्ली: पक्षी (Birds) अक्सर बिजली के तारों या खंभों पर बैठते हैं, और कुछ तो वहां घोंसले भी बनाते हैं। फिर भी, उन्हें बिजली का झटका नहीं लगता, जबकि इंसान के लिए ऐसा करना जानलेवा हो सकता है। आखिर इसका कारण क्या है? यह समझने के लिए हमें बिजली के काम करने के तरीके को जानना होगा।
बिजली का प्रवाह और वोल्टेज का अंतर
बिजली धातु के तारों में उसी तरह बहती है, जैसे पानी पाइप में बहता है। यह उच्च वोल्टेज (विद्युत दबाव) वाली जगह से कम वोल्टेज या जमीन की ओर जाती है, जो शून्य वोल्टेज की स्थिति में होती है। बिजली को बहने के लिए एक पूरा सर्किट चाहिए, जिसमें वह स्रोत से निकलकर वापस स्रोत या जमीन तक पहुंचे। जब कोई पक्षी बिजली के तार पर बैठता है, तो वह अपने दोनों पैर एक ही तार पर रखता है। इस स्थिति में उसके शरीर में वोल्टेज का कोई अंतर नहीं होता, क्योंकि दोनों पैर एक ही वोल्टेज स्तर पर हैं। चूंकि वोल्टेज में अंतर नहीं है, बिजली पक्षी के शरीर से होकर नहीं बहती, और उसे झटका नहीं लगता।
खतरा तब, जब दो अलग-अलग वोल्टेज बिंदु छूए जाएं
पक्षी तब तक सुरक्षित रहता है, जब तक वह केवल एक तार को छूता है। लेकिन अगर वह एक साथ दो अलग-अलग वोल्टेज वाले तारों या एक तार और जमीन से जुड़ी किसी चीज (जैसे खंभा या पेड़) को छू ले, तो उसके शरीर से बिजली का प्रवाह शुरू हो जाता है। ऐसा होने पर पक्षी का शरीर बिजली के लिए रास्ता बन जाता है, जिससे उसे झटका लग सकता है या उसकी मृत्यु हो सकती है। यही कारण है कि बिजली के तारों को एक-दूसरे से पर्याप्त दूरी पर और ऊंचाई पर रखा जाता है, ताकि पक्षी या इंसान गलती से दो बिंदुओं को न छू सकें।
इंसानों के लिए खतरा क्यों?
इंसान आमतौर पर जमीन के संपर्क में रहते हैं, जो शून्य वोल्टेज पर होती है। अगर कोई व्यक्ति जमीन पर खड़े होकर बिजली के तार को छूता है, तो उसके शरीर से बिजली जमीन की ओर बहने लगती है, जिससे गंभीर झटका लगता है। बिजली के तारों पर काम करने वाले कर्मचारी (लाइनमैन) विशेष सुरक्षात्मक उपकरण और इंसुलेटेड गियर का उपयोग करते हैं, ताकि वे बिजली के प्रवाह से बच सकें।
पक्षियों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए उपाय
पक्षियों को बिजली के झटके से बचाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। भारत और विश्व स्तर पर संरक्षण संगठन, जैसे कि एवियन पावर लाइन इंटरेक्शन कमेटी और अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN), बिजली के तारों और खंभों को पक्षी-सुरक्षित बनाने के लिए दिशानिर्देश जारी करते हैं। इन उपायों से न केवल पक्षियों की सुरक्षा होती है, बल्कि बिजली कटौती जैसी समस्याओं को भी कम किया जाता है।



