International Plastic Bag Free Day: खाद्य सामग्री के साथ थाली में पहुंच रहा Plastic का अनदेखा खतरा

पाबंदी के बाद भी देश की राजधानी में प्लास्टिक खुलेआम बिक रहा है। स्वादिष्ट व्यंजनों की पैकिंग इसी से होती है, जो जहर के तौर पर हमारे-आपके शरीर में पहुंच रही है।

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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में हर दिन लोग अपनी थाली में स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लेते हैं, लेकिन उनके साथ एक छिपा हुआ खतरा भी परोसा जा रहा है-सिंगल यूज प्लास्टिक (International Plastic Bag Free Day)। यह प्लास्टिक न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर जोखिम बन रहा है।

सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध के बावजूद, यह खाद्य सामग्री, सब्जियों और अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं के जरिए घरों तक पहुंच रहा है। एक अध्ययन के अनुसार, दिल्ली उन पांच शहरों में शामिल है जहां सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध का सबसे कम असर हुआ है। शहर के 88 प्रतिशत बाजारों और दुकानों में प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग अब भी बड़े पैमाने पर हो रहा है।

प्रतिबंध के तीन साल बाद भी नहीं रुका प्लास्टिक का उपयोग
1 जुलाई 2022 से देशभर में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लागू है, लेकिन दिल्ली के बाजारों में इसकी मौजूदगी कम नहीं हुई। लाजपत नगर, सरोजिनी नगर, कनॉट प्लेस, करोल बाग, राजौरी गार्डन और सदर बाजार जैसे प्रमुख बाजारों में प्लास्टिक बैग, स्ट्रॉ, थर्माकोल और डिस्पोजेबल कटलरी जैसी प्रतिबंधित वस्तुओं का खुलेआम उपयोग हो रहा है। खासतौर पर फल-सब्जी विक्रेता, स्ट्रीट फूड स्टॉल, जूस की दुकानें और इंडिया गेट, रेलवे स्टेशन जैसे पर्यटक स्थलों के आसपास इनका इस्तेमाल आम है। चाय, मोमोज, समोसे की चटनी जैसे खाद्य पदार्थ भी प्रतिबंधित प्लास्टिक पैकेजिंग में ही परोसे जा रहे हैं।

हर दिन 1100 टन से ज्यादा प्लास्टिक कचरा
दिल्ली में प्रतिदिन 1,113 टन से अधिक प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से अधिकांश सिंगल यूज प्लास्टिक से संबंधित है। हैरानी की बात यह है कि इसमें से केवल 870 टन कचरे का ही प्रबंधन या रीसाइक्लिंग हो पाता है। बाकी 240 टन से ज्यादा कचरा पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है। यह कचरा नालियों को जाम करता है, खासकर मानसून के दौरान, जिससे जलभराव की समस्या और बढ़ जाती है। नालियों से निकलने वाले कचरे में अधिकांश प्रतिबंधित प्लास्टिक ही पाया जाता है, जो न तो सड़ता है और न ही आसानी से नष्ट होता है।

न प्रशासन की सख्ती, न नागरिकों का सहयोग
सिंगल यूज प्लास्टिक की समस्या से निपटने में न तो प्रशासन पूरी तरह सफल हो पाया है और न ही नागरिकों का सहयोग मिल रहा है। प्रतिबंध के बावजूद इन वस्तुओं का उत्पादन, बिक्री और उपयोग जारी है। नियमों के उल्लंघन पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना और सात साल तक की सजा का प्रावधान है, फिर भी बाजारों में सिंगल यूज प्लास्टिक की उपलब्धता कम नहीं हुई। लोग सुविधा के लिए इनका उपयोग कर रहे हैं, जबकि पर्यावरण और स्वास्थ्य पर इसके दुष्प्रभावों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

क्या है सिंगल यूज प्लास्टिक और प्रतिबंध?
सिंगल यूज प्लास्टिक ऐसी वस्तुएं हैं जिन्हें एक बार इस्तेमाल के बाद फेंक दिया जाता है। इनमें प्लास्टिक के स्ट्रॉ, इयरबड्स, गुब्बारों की स्टिक, थर्माकोल, डिस्पोजेबल कप, प्लेट, चम्मच, चाकू, मिठाई के डिब्बों की शीट, सिगरेट पैकेट की पन्नी आदि शामिल हैं। 1 जुलाई 2022 से इन 19 वस्तुओं पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके अलावा, 75 माइक्रोन से कम मोटाई के प्लास्टिक कैरी बैग भी प्रतिबंधित हैं, और 31 दिसंबर 2022 से इसकी मोटाई को 120 माइक्रोन करने का नियम है। तंबाकू, पान मसाला और गुटखा पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक पाउच भी प्रतिबंधित हैं।

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर खतरा
सिंगल यूज प्लास्टिक न केवल पर्यावरण को प्रदूषित करता है, बल्कि खाद्य सामग्री के जरिए माइक्रोप्लास्टिक मानव शरीर में प्रवेश कर रहा है, जो कैंसर, हार्मोनल असंतुलन और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। दिल्ली में उत्पन्न होने वाले कुल ठोस कचरे का 5.6 प्रतिशत सिंगल यूज प्लास्टिक है, जो पर्यावरण को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए प्रशासन को सख्ती और नागरिकों को जागरूकता व सहयोग की जरूरत है।

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