चमगादड़ों की वसा जमा करने की रणनीति पर Climate Change का खतरा

वैज्ञानिकों ने विश्व भर के चमगादड़ों पर किए गए सैकड़ों अध्ययनों का विश्लेषण कर पाया कि वसा जमा करने की प्रक्रिया न केवल ठंडे क्षेत्रों में, बल्कि उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भी व्यापक है।

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नई दिल्ली: चमगादड़ों को लेकर लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि वे सर्दियों से पहले वसा जमा करते हैं, ताकि ठंड के महीनों में जीवित रह सकें। हालांकि, जलवायु परिवर्तन (Climate Change) इस पर प्रभाव डाल रहा है। लेकिन हाल ही में ‘इकोलॉजी लेटर्स’ नामक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशित एक नए शोध ने इस धारणा को चुनौती दी है।

वैज्ञानिकों ने विश्व भर के चमगादड़ों पर किए गए सैकड़ों अध्ययनों का विश्लेषण कर पाया कि वसा जमा करने की प्रक्रिया न केवल ठंडे क्षेत्रों में, बल्कि उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भी व्यापक है। शोध के अनुसार, उष्णकटिबंधीय सवाना और मानसूनी जंगलों जैसे क्षेत्रों में रहने वाले चमगादड़ सूखे मौसम की तैयारी में वसा जमा करते हैं, जब भोजन जैसे फूल और कीट कम हो जाते हैं, जिससे ऊर्जा की कमी का खतरा बढ़ जाता है।  

एक शोधकर्ता के अनुसार, कुछ चमगादड़ की प्रजातियां मौसम के आने से पहले ही अपने शरीर का वजन 50 फीसदी तक बढ़ा लेती हैं। यह उनके लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि उड़ान के लिए उन्हें पहले से ही बहुत अधिक ऊर्जा चाहिए होती है।” यह रणनीति चमगादड़ों के लिए जीवित रहने का एक महत्वपूर्ण तरीका रही है।

लेकिन वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन इस संतुलन को बिगाड़ सकता है। अनियमित मौसम और बदलते सूखे के चक्र चमगादड़ों को समय पर वसा जमा करने का अवसर नहीं देंगे, जिससे उनकी संख्या और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है।  

जलवायु और वसा जमा करने का संबंध
शोध के अनुसार, ठंडे क्षेत्रों में चमगादड़ सर्दियों से पहले वसा जमा करते हैं, लेकिन गर्म क्षेत्रों जैसे उष्णकटिबंधीय सवाना और मानसूनी जंगलों में भी वे सूखे मौसम की आशंका में ऐसा करते हैं। सूखे के दौरान फूलों और कीटों की कमी के कारण भोजन दुर्लभ हो जाता है। कुछ प्रजातियों में वजन 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ जाता है, जो उड़ान के लिए भारी बोझ है। यह चमगादड़ों के लिए ऊर्जा संरक्षण और उड़ान में चुस्ती के बीच एक नाजुक संतुलन को दर्शाता है।  

प्रजनन और वसा संरक्षण
ठंडे क्षेत्रों में मादा चमगादड़ सर्दियों में वसा का उपयोग नर की तुलना में अधिक सावधानी से करती हैं। यह संभवतः इसलिए है ताकि वसंत में बच्चों को पालने के लिए उनके पास पर्याप्त ऊर्जा बची रहे। यह रणनीति उनकी प्रजनन सफलता को बढ़ाती है। लेकिन गर्म क्षेत्रों में यह अंतर नहीं दिखता, जहां नर और मादा चमगादड़ वसा का उपयोग समान रूप से करते हैं, शायद इसलिए कि वहां भोजन अधिक उपलब्ध होता है। यह दर्शाता है कि जलवायु चमगादड़ों के व्यवहार और शारीरिक प्रक्रियाओं को गहराई से प्रभावित करती है।  

जलवायु परिवर्तन का बढ़ता खतरा
शोध से पता चलता है कि गर्म क्षेत्रों में चमगादड़ों में वसा भंडारण की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का संकेत हो सकता है। जलवायु परिवर्तन न केवल तापमान बढ़ा रहा है, बल्कि मौसम को अप्रत्याशित भी बना रहा है। लंबे और अनिश्चित सूखे चमगादड़ों को अधिक वसा जमा करने के लिए मजबूर कर सकते हैं, जिससे उन्हें अधिक भोजन की तलाश में जोखिम उठाना पड़ता है। यह उनकी मृत्यु दर बढ़ा सकता है। चमगादड़ कीटों को नियंत्रित करने, फसलों को परागण करने और पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि उनकी यह रणनीति प्रभावित होती है, तो पूरे खाद्य जाल पर इसका असर पड़ सकता है। 

चमगादड़ों का अनिश्चित भविष्य
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन चमगादड़ों के बारे में हमारी समझ को बदलता है। वे केवल पर्यावरण परिवर्तन के शिकार नहीं हैं, बल्कि मौसमी बदलावों के साथ तालमेल बिठाने वाले रणनीतिक प्राणी हैं। हालांकि, उनकी अनुकूलन क्षमता की सीमाएं हैं, और तेजी से बदलती जलवायु इन सीमाओं को परख रही है। चमगादड़ों का भविष्य अनिश्चित है, और उनके साथ-साथ पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन भी खतरे में है।

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