योग महज शरीर को मरोड़ने या सांसों पर कंट्रोल करने की तकनीक भर नहीं, यह परम होश में आने का अनूठा उपाय है। जैसे-जैसे इसकी ख्याति पूरी दुनिया में बढ़ी है, वैसे-वैसे कई भ्रांतियां भी पैदा हुई। कई मानते हैं कि योग मोटापा कम करने के लिए है, तो कोई लॉजिक देते है कि वो सेहतमंद हैं इसलिए योग की उनको जरुरत नहीं। यानी बीमार लोगों के लिए योग है। योग को लेकर इसतरह की कई गलत धारणाएं सुनी जा सकती हैं।
वर्तमान में होना है योग
योग प्रैक्टिस के कई टूल्स हैं। आसन, प्राणायाम, धारणा, ध्यान जैसे कई टूल्स के जरिए योग हमें अपने तल से जोड़ता है, यानी उसके प्रति हमें होश में लाता है। हमारा मन हर तरह से हमें बेहोशी की तरफ ले जा रहा है। मन का ये स्वभाविक गुण है कि वो या तो भविष्य में होगा या फिर बिते हुए वक्त यानी भूत में। जीवन हमेशा वर्तमान में होता है, लेकिन भूत-भविष्य में फंसा हमारा मन हमें जीवन से तोड़े रखता है। जब हम योग प्रैक्टिस करते हैं तो हम अपने मन को भूत-भविष्य से हटाकर वर्तमान में ले आने में सफल होते हैं- जो होश की अवस्था है। हर टूल्स की प्रैक्टिस हमें वर्तमान के प्रति ज्यादा सजग होने की ट्रेनिंग देता है और वर्तमान में होना ही योग है।
सजगता से ऊर्जा संरक्षण
मन जब वर्तमान में स्थिर होता है तो हम अपनी ऊर्जा गैर जरुरी सोचने में खपत होने से बचा पाते हैं। एक रिसर्च के मुताबिक, हमारा मन हर दिन औसत 70 हजार से ज्यादा बातें सोचता है। इन 70 हजार बातों में मुश्किल से 7 हजार बातें काम की होती हैं। ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते है कि माइंडफुलनेस को बढ़ावा देने की योग की अनोखी तकनीक कैसे हमारी ऊर्जा को खपत होने से बचाती है। होश में आने से पहली बात ये घटती है कि हम गैर-जरुरी बातों और गतिविधियों को टाल पाते हैं। जब मन इस अमन की अवस्था को प्राप्त होता है तो इस बची ऊर्जा का उपयोग हमारे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास में हो पाता है।
अहम ये नहीं कि आप हठ योग की प्रैक्टिस करते हैं या फिर अष्टांग विन्यास। जरूरी ये है कि आप इन टूल्स के जरिए खुद से जुड़ने में कितना कारगर हो पाते है। माइंडफुलनेस माध्यम है, जिससे हम अपने जीवन रुपी ध्येय को हासिल कर पाएंगे। होश परम योग है और बेहोशी महारोग। आएं होश को जीवनसूत्र बनाएं।
10 बेसिक योग आसन
. शुरुआती प्रैक्टिस के लिए योग गाइड
. आसन के लाभ और सावधानियां
. लचीलापन और शारीरिक मजबूती के लिए फॉण्डेशन आसन
योग प्रैक्टिस की शुरुआत खुद का ख्याल रखने का सबसे आसान और असरदार रास्ता है। योग में कई तरह के आसन होते हैं, लेकिन उन सभी को कर पाना ना तो मुमकिन है और ना ही इसकी कोई जरुरत है। गुरुजी अमूमन कहते हैं कि ‘योग में थोड़ा भी बहुत है अगर सही सिस्टम और श्रद्धा से की जाए’। आपके हाथ में मौजूद 10 बेसिक आसनों का ये बुकलेट योगगुरु धीरज वशिष्ठ जी के मार्गदर्शन में तैयार की गई है। गुरुजी कहते हैं, आप इन 10 बेसिक आसन पर मास्टरी करें और ये आसन ताउम्र आपकी योग प्रैक्टिस और जीवन को एक बेहतर आधार प्रदान करेगा।
1. अधोमुख श्वानासन
2. त्रिकोणासन
3. प्रसारित पाद उत्तानासन
4. पार्श्व उत्तानासन
5. वृक्षासन
6. वीर भद्रासन-बी
7. बद्ध कोणासन
8. जानु-शिरासन
9. सेतु बंधासन
10. अर्ध मत्स्येन्द्रासन
1. अधोमुख श्वानासन

लाभ :
-पूरे शरीर को स्ट्रेच कर स्फूर्ति बढ़ाता है
– अपर बॉडी, कंधों और हाथों को मजबूत करता है
– मस्तिक में शांति, तनाव और डिप्रेशन में लाभदायक
– रीढ़ या स्पाइन में मौजूद तनाव को दूर करता है
– बैकपेन, अनिद्रा, सिरदर्द और सुस्ती के उपचार में कारगर
सावधानियां
गर्भधारण के आख़िरी चरण, डायरिया और कलाई दर्द में इस आसन का अभ्यास ना करें
2. त्रिकोणासन

लाभ :
– पांव, रीढ़, छाती और दूसरे कई जगहों में खिंचाव कर मसल्स रिलैक्स करता है
– तनाव दूर करने में कारगर
– पाचन क्रिया को सपोर्ट करता है
– साइटिका, फ्लेट फीट, हड्डी की कमजोरी जैसी बीमारियों में लाभदायक
– मैनेपॉउज के दौरान होने वाली शारीरिक परेशानियों को मैनेज करता है
सावधानियां
लो ब्लड प्रेशर, डायरिया और सिरदर्द जैसी समस्याओं में इस आसन के अभ्यास से बचें
3. प्रसारित पाद उत्तानासन

लाभ
– पांव के पिछली हिस्से को स्ट्रेच कर मसल्स रिलैक्स करता है
– स्पाइन को ज्यादा ओपन कर रिलीफ पहुंचाता है
– पेट के पास मौजूद सभी ऑर्गन को मजबूती देता है
– मन-मस्तिष्क में शांति
– अर्थराइटिस और साइटिका में लाभदायक
सावधानियां
किसी को कमर के निचली हिस्से में दर्द हो या स्लिप डिस्क की समस्या हो तो योग्य शिक्षक की निगरानी में मोडिफाइड आसन करें
4. पार्श्व उत्तानासन

लाभ :
– हिप्स और हेमास्ट्रिंग में खिंचाव करता है
– पांव की थकावट को तुरंत दूर कर स्फूर्ति लाता है
– ब्लड का फ्लो सिर की ओर होने से मन-मस्तिष्क को शांत करता है
– संतुलन की सेन्स को बढ़ाता है
– डाइजिस्टिव सिस्टम को जाग्रत करता है
सावधानियां
निचली कमर में दर्द की शिकायत पर आसन को शिक्षक की निगरानी में मोडिफाइड कर अभ्यास करें
5. वृक्षासन

लाभ :
– पांव की मांसपेशियों को मजबूती देता है
– मन की शांति और एकाग्रता को बढ़ाता है
– संतुलन की सेन्स को एक्टिव करता है
– शरीर-मन के बीच संतुलन को स्थापित करने में मदद करता है
– नर्वस सिस्टम को मजबूत करता है
सावधानियां
मेडिकल के वो कंटीशन जो आपके संतुलन को प्रभावित करता है, ऐसी स्थितियों में ये आसन ना करें। साथ ही गर्भधारण के आख़िरी चरण और बहुत मोटापे की स्थिति में ( संतुलन इश्यू हो तो) भी इस आसन का अभ्यास ना करें
6. वीरभद्रासन – बी

लाभ :
– पूरे पांव को मजबूत और स्ट्रेच करता है
– खासतौर पे घुटने, थाइ और एंकल की मजबूती में कारगर
– संतुलन, फोकस और कोर (Core) मजबूती में असरदार
– गर्भकाल के छठे महीने में कमर-दर्द जैसी परेशानियों में मददगार
– साइटिका और फ्लेट फिट जैसी समस्याओं में थेरेपी
सावधानियां
– डायरिया और हाई ब्लडप्रेशर में इस आसन का अभ्यास ना करें
7. बद्ध कोणासन

लाभ:
– पेट की मांसपेशियों, किडनी, प्रोस्टेट ग्लैंड को आंतरिक मालिश कर सेहतमंद करता है
– थाइ और हिप्स के हिस्से को स्ट्रेच कर रिलैक्स करता है
– गर्भधारण से संबंधित समस्याओं और प्रोस्टेट ग्लैंड की तक़लीफ में मददगार
– लगातार अभ्यास से गर्भधारण और बेवी डिलिवरी में लाभ
– पीरियड से संबंधित दर्द और अनियमितता से छुटकारा
सावधानियां
– घुटने के दर्द में ना करें
– स्लिप डिस्क या कमरदर्द की स्थिति में योग शिक्षक की राय से आसन को मोडिफाइड करें
8. जानु शिरासन

लाभ:
– हाईब्लड प्रेशर, अनिद्रा में लाभदायक
– मन को शांति को बढ़ावा और डिप्रेशन में मददगार
– लीवर और किडनी जैसे आंतरिक अंगों की मालिश करता है
– अवसाद, थकान, सिरदर्द और पीरियड संबंधित तक़लीफ में भी असरदार
– हेम्स्ट्रिंग, स्पाइन, कमर और कंधों की मांसपेशियों में स्ट्रेच कर रिलीफ करता है
सावधानियां
अस्थमा और घुटने की तकलीफ में इस आसन को सावधानी से करें
9. सेतु बंधासन

लाभ:
– फेफड़े और थाइराइड ग्लैंड को एक्टिव कर सेहतमंद रखता है
– पेट के आंतरिक अंगों की मालिश कर पाचनतंत्र को मजबूत करता है
– मन को शांत कर तनाव और डिप्रेशन मैनेजमेंट में मददगार
– अस्थमा, हाईब्लड प्रेशर, साइन्स जैसी समस्या में थेरेपी देता है
– पांव की थकावट दूर करता है और पीरियड जनित समस्या में सहयोगी
सावधानियां
– घुटने और गर्दन की समस्या हो तो अतिरिक्त सावधानी बरतें
10. अर्ध मत्स्येन्द्रासन

लाभ:
– लीवर और किडनी को एक्टिव कर शरीर की शुद्धि में मददगार
– स्पाइन को यंग और ऊर्जावान रखता है
– पाचन तंत्र के लिए काफी लाभदायक
– साइटिका, कमरदर्द जैसी परेशानी को मैनेज करता है
– कंधे, गर्दन, कमर की मांसपेशियों में बेहतरीन स्ट्रेच करता है
सावधानियां
– कमर दर्द और रीढ़ की परेशानियों में योग शिक्षक की देखरेख में अभ्यास करें

अहमदाबाद, गुजरात



