नई दिल्ली। देश की सबसे कठिन और पवित्र धार्मिक यात्राओं में से एक अमरनाथ यात्रा इस बार इतिहास रचने जा रही है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन के ठोस प्रयासों के चलते अमरनाथ यात्रा देश की पहली ‘जीरो लैंडफिल पिलग्रिमेज’ (शून्य अपशिष्ट तीर्थयात्रा) बनने की राह पर है। इसका सीधा मतलब यह है कि यात्रा के दौरान उत्पन्न होने वाला कोई भी कचरा डंपिंग ग्राउंड या लैंडफिल में फेंककर पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाएगा, बल्कि पूरे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कर उसे उपयोगी संसाधनों में बदला जाएगा।
700 मीट्रिक टन कचरे का अनुमान
इस वर्ष 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक चलने वाली इस पवित्र यात्रा में 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान है। इतनी बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों की मौजूदगी के कारण यात्रा मार्ग पर लगभग 700 मीट्रिक टन कचरा निकलने का आकलन किया गया है। इतने भारी-भरकम कचरे से निपटने के लिए प्रशासन ने बेहद आधुनिक और वैज्ञानिक ब्लू-प्रिंट तैयार किया है।
खच्चरों के गोबर से बनेगी बायोगैस, लगेंगे वाटर ATM
इस इको-फ्रेंडली पहल के तहत यात्रा मार्ग पर चलने वाले खच्चरों के गोबर को बेकार फेंकने के बजाय उससे बायोगैस तैयार की जाएगी। इसके अलावा, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के इस्तेमाल को पूरी तरह हतोत्साहित करने के लिए पूरे रास्ते में ‘वाटर एटीएम’ (Water ATMs) स्थापित किए गए हैं। इस पूरी मुहिम को जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण स्वच्छता विभाग और ‘स्वाहा रिसोर्स मैनेजमेंट’ द्वारा संयुक्त रूप से धरातल पर उतारा जा रहा है।
बालटाल और पहलगाम मार्गों पर विशेष सफाई दल तैनात
ग्रामीण स्वच्छता विभाग की महानिदेशक अनु मल्होत्रा ने बताया कि यात्रा के दोनों मुख्य मार्गों बालटाल और पहलगाम पर कड़े इंतजाम किए गए हैं। दोनों रूटों पर पर्याप्त संख्या में डस्टबिन लगाए गए हैं और विशेष सफाई दलों की तैनाती की गई है। सफाईकर्मी यात्रा के पहले दिन से ही चौबीसों घंटे सक्रिय हैं। वे ठोस और तरल दोनों प्रकार के कचरे को एकत्र कर रहे हैं, जिसे ‘हाई-एंड मशीनों’ के ज़रिए तुरंत वैज्ञानिक रूप से प्रोसेस किया जा रहा है।
प्रशासन के इस कदम की चौतरफा सराहना हो रही है, जिसने न केवल पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश की है, बल्कि देश की अन्य बड़ी धार्मिक यात्राओं के लिए भी एक आदर्श मॉडल स्थापित कर दिया है।



