नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने एक साक्षात्कार में कहा कि अंतिम संस्कार के दौरान ईरान का शीर्ष नेतृत्व एक ही स्थान पर मौजूद था और अमेरिका चाहे तो ‘एक ही हमले में’ सभी को निशाना बना सकता था। हालांकि उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं किया गया, क्योंकि तब बातचीत के लिए कोई नहीं बचता। उन्होंने अंतिम संस्कार में रो रहे लोगों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि “शायद ये आंसू भी नकली हों।
ट्रंप के बयान पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। आर्मेनिया स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर कहा कि “लोगों को मारा जा सकता है, लेकिन विचारों को नहीं। आपके पास न सभ्यता है, न इतिहास और न सम्मान।”
तेहरान में उमड़ी भीड़
तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड मोसल्ला में खामेनेई के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। अंतिम संस्कार के दौरान “डेथ टू अमेरिका” और “डेथ टू इजराइल” के नारे भी लगाए गए। ईरान में खामेनेई के सम्मान में सप्ताहभर चलने वाले शोक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
मशहद में होगा अंतिम संस्कार
खामेनेई को ईरान के पवित्र शहर मशहद में इमाम रजा की दरगाह के परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इससे पहले उनका पार्थिव शरीर तेहरान के अलावा क़ोम, इराक के नजफ और करबला जैसे प्रमुख शिया धार्मिक स्थलों पर भी श्रद्धांजलि के लिए ले जाया जा रहा है।
क्यों खास है इमाम रजा की दरगाह?
मशहद स्थित इमाम रजा की दरगाह शिया मुसलमानों के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक मानी जाती है। शिया परंपरा के 12 इमामों में इमाम रजा आठवें इमाम थे और वे एकमात्र ऐसे इमाम हैं जिन्हें ईरान की धरती पर दफनाया गया। बाकी इमामों की मज़ारें सऊदी अरब और इराक में स्थित हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इमाम रजा की बढ़ती लोकप्रियता से चिंतित तत्कालीन अब्बासी खलीफा ने उन्हें जहर देकर मरवा दिया था। जिस स्थान पर उन्हें दफनाया गया, वही बाद में “मशहद” कहलाया, जिसका अर्थ है “शहादत का स्थान”। आज यह शहर शिया समुदाय के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में शामिल है और यहां हर वर्ष दुनिया भर से लाखों लोग पहुंचते हैं।



