दिल्ली। राजधानी में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों और बिना अनुमति के निर्माण के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई होगी। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने DDA को जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने के निर्देश दिए हैं। ड्रोन, जियो-टैगिंग और रियल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग से अवैध निर्माण की पहचान की जाएगी। यमुना के बाढ़ क्षेत्र (ओ-जोन) समेत संवेदनशील इलाकों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी और अतिक्रमण पर तत्काल कार्रवाई होगी।
तकनीक से रियल-टाइम निगरानी पर जोर
उपराज्यपाल ने निर्देश दिया कि भूमि और भवनों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाया जाए, ताकि किसी भी अवैध कब्जे या निर्माण का तुरंत पता लगाकर कार्रवाई की जा सके।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई
डीडीए ने बताया कि भूमि संरक्षण के लिए 14 फ्लाइंग स्क्वॉड गठित किए गए हैं, जो नियमित फील्ड निरीक्षण कर रहे हैं। अप्रैल 2025 के बाद से अब तक लगभग 241 एकड़ सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है, जबकि विकास क्षेत्रों में 235.96 एकड़ भूमि से अवैध निर्माण हटाए गए हैं।
ड्रोन सर्वे जारी
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) में डीडीए, एमसीडी और सर्वे ऑफ इंडिया के सहयोग से ड्रोन सर्वेक्षण जारी है। 1,370 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से 1,122 वर्ग किलोमीटर का सर्वे पूरा हो चुका है, जिसमें पूरा O-Zone क्षेत्र शामिल है।
अवैध निर्माण पर विशेष अभियान
अवैध निर्माणों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। नियमों का उल्लंघन करने वाले आर्किटेक्ट्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई और ब्लैकलिस्टिंग के निर्देश दिए गए हैं। असुरक्षित और जर्जर भवनों की रिपोर्ट तुरंत एमसीडी को भेजने को भी कहा गया है।
भूमि प्रबंधन और निगरानी
डीडीए के अनुसार लगभग 3,700 भूमि पार्सलों करीब 21,773 एकड़ को जियो-टैग कर उनकी नियमित निगरानी की जा रही है।
विकसित दिल्ली पर फोकस
उपराज्यपाल ने कहा कि दिल्ली के सतत और योजनाबद्ध विकास के लिए तकनीक आधारित, पारदर्शी और समन्वित प्रणाली जरूरी है। उन्होंने “विकसित दिल्ली” के लक्ष्य को तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
बैठक में सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी, सुधांशु त्रिवेदी सहित डीडीए, डीएमआरसी, एनसीआरटीसी, बिजली विभाग और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।



