नई दिल्ली: बाल्टीमोर (अमेरिका): समुद्र की लहरों को चीरते हुए और भारत के तिरंगे को वैश्विक मंच पर गर्व से लहराते हुए, भारतीय नौसेना का प्रसिद्ध सेल ट्रेनिंग शिप (Sail Training Ship) INS सुदर्शिनी 26 जून 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका के पोर्ट ऑफ बाल्टीमोर (Port of Baltimore) पहुँच गया है। यह केवल एक सामान्य डॉकिंग या नौसैनिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत महत्वाकांक्षी और ऐतिहासिक अंतर-महासागरीय अभियान ‘लोकायन 26′ (Lokayan 26) का एक बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव है।
कोच्चि (केरल) के तट से शुरू होकर अमेरिका के पूर्वी तट तक के इस लंबे और चुनौतीपूर्ण सफर ने एक बार फिर साबित किया है कि भारतीय नौसेना की नौकायन क्षमताएं और उसकी समुद्री कूटनीति दुनिया के किसी भी कोने में भारत का प्रभाव स्थापित करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
नॉरफॉक से बाल्टीमोर: एक विहंगम और ऐतिहासिक सफर
बाल्टीमोर पहुंचने से पहले इस जहाज ने अमेरिकी जलक्षेत्र में एक बेहद जटिल और खूबसूरत यात्रा पूरी की। नॉरफॉक से बाल्टीमोर तक के अपने सफर के दौरान, INS सुदर्शिनी ने ऐतिहासिक चेसापीक एंड डेलावेयर (C&D) नहर से होकर रास्ता तय किया।
यह मार्ग नौसैनिकों के कौशल की वास्तविक परीक्षा था। यात्रा के दौरान इस टॉल शिप ने मध्य-अटलांटिक क्षेत्र के कई प्रमुख और ऐतिहासिक पुलों के नीचे से गुजरते हुए अपनी भव्यता का प्रदर्शन किया। इतने बड़े पाल वाले जहाज (Sail Ship) को इन संकरे और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण रास्तों से सुरक्षित निकालना भारतीय नौसेना के अधिकारियों और कैडेटों के उत्कृष्ट प्रशिक्षण तथा सूझबूझ का जीता-जागता प्रमाण है।
समुद्री कूटनीति और भारत-अमेरिका संबंध
बाल्टीमोर के बंदरगाह पर INS सुदर्शिनी की मौजूदगी भारत की समृद्ध और हजारों साल पुरानी समुद्री विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने का माध्यम बनी है। इसके साथ ही, यह ऐतिहासिक क्षण भारतीय नौसेना और अमेरिकी नौसेना (US Navy) के बीच बढ़ते आपसी विश्वास, मित्रता तथा रणनीतिक सहयोग के मजबूत संबंधों को रेखांकित करता है।
अपने बाल्टीमोर प्रवास के दौरान जहाज निम्नलिखित महत्वपूर्ण गतिविधियों का हिस्सा बनेगा:
- समुद्री सहभागिता (Maritime Engagement): दोनों देशों के नौसैनिक अधिकारी और कैडेट तकनीकी व पेशेवर विषयों पर अपने अनुभव साझा करेंगे।
- सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम (Community Outreach): स्थानीय लोगों और भारतीय प्रवासियों के लिए जहाज पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे ताकि वे भारत की अनूठी नौसैनिक परंपराओं को करीब से समझ सकें।
Sail250 Maryland और Virginia उत्सवों में भारत का गौरव
INS सुदर्शिनी की यह यात्रा एक और कारण से बेहद खास है। अमेरिका अपनी स्थापना के 250 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है। बाल्टीमोर में होने वाले मुख्य कार्यक्रमों से ठीक पहले, यहाँ Sail250 Maryland celebrations का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें भारत अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
इससे पहले, बाल्टीमोर पहुँचने की राह में INS सुदर्शिनी ने 19 से 23 जून 2026 के बीच Sail250 Virginia celebrations में भी हिस्सा लिया था। वर्जीनिया में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय समारोह में दुनिया भर से आए बेहतरीन और विशालकाय टॉल शिप्स (Tall Ships) के बीच भारतीय नौसेना के इस जहाज ने अकेले पूरे भारत का प्रतिनिधित्व किया। जहाज के चालक दल (Crew) ने वहाँ आयोजित भव्य ‘परेड ऑफ सेल’ (Parade of Sail) और ‘सिटी क्रू परेड’ (City Crew Parade) में भाग लिया, जहाँ भारतीय नौसैनिकों के अनुशासन और मार्चिंग ने स्थानीय दर्शकों का दिल जीत लिया।
13,000 मील का सफर: ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का संदेश
यदि इस पूरे अभियान के आंकड़ों और इसके पीछे के जज्बे को देखें, तो यह किसी को भी विस्मित कर सकता है। केरल के कोच्चि से लेकर अमेरिका के नॉरफॉक तक, पिछले पाँच महीनों के अथक परिश्रम में इस जहाज ने 13,000 से अधिक समुद्री मील (Nautical Miles) की विशाल दूरी तय की है।
महासागरों के तूफानों, बदलते मौसम और अज्ञात जलक्षेत्रों को पार करते हुए यह अंतर-महासागरीय अभियान भारत की प्राचीन समुद्री परंपराओं और वैश्विक संपर्क (Global Connectivity) को जीवित रखने का सबसे बड़ा उदाहरण है।
वसुधैव कुटुम्बकम् (The World is One Family): INS सुदर्शिनी का यह अभियान केवल सीमाओं को नापने के लिए नहीं है, बल्कि यह भारत के इसी मूल विचार का संदेश दुनिया भर में फैला रहा है। यह जहाज महासागरों की विशाल दूरियों को पाटकर विभिन्न देशों के बीच मित्रता, सहयोग, शांति और आपसी विश्वास के सेतु का निर्माण कर रहा है।



