नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र के एक जांच आयोग ने अपनी ताजा रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि गाजा और वेस्ट बैंक में इजराइली सैन्य अभियानों के दौरान फिलिस्तीनी बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाया गया। रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर 2023 से अब तक 20 हजार से अधिक बच्चों की मौत हुई है, जबकि 44 हजार से ज्यादा बच्चे घायल हुए हैं। इस अवधि में हुई कुल मौतों में लगभग 30 प्रतिशत बच्चे शामिल रहे हैं।
रिपोर्ट से हड़कंप
आयोग के अध्यक्ष और भारत के पूर्व हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश एस. मुरलीधर ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि जांच के दौरान बच्चों को लक्ष्य बनाकर किए गए हमलों के पुख्ता सबूत मिले हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इजराइली सेना के खिलाफ मानवता के विरुद्ध अपराध और युद्ध अपराधों से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों की मौतें हवाई हमलों, ड्रोन हमलों और स्नाइपर फायरिंग के दौरान हुईं। कई मामलों में उनके सिर और शरीर के ऊपरी हिस्से को निशाना बनाए जाने के संकेत मिले हैं।
युद्धविराम के बाद भी हमला
रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर 2025 में इजराइल और हमास के बीच युद्धविराम लागू होने के बाद भी फिलिस्तीनी बच्चों के मारे जाने और घायल होने की घटनाएं जारी रहीं। हालांकि आयोग ने युद्धविराम के बाद मारे गए बच्चों की संख्या का अलग से उल्लेख नहीं किया है।
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने पिछले सप्ताह दावा किया था कि युद्धविराम लागू होने के बाद भी औसतन प्रतिदिन एक फिलिस्तीनी बच्चे की मौत हुई। यूनिसेफ के प्रवक्ता जेम्स एल्डर के अनुसार, बच्चे अपने घरों, स्कूलों, खेल के मैदानों और समुद्र तटों पर भी हमलों का शिकार हुए।
भविष्य का आतंकवादी बताकर हमला
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में 18 वर्ष से कम आयु के सभी लोगों को बच्चे की श्रेणी में रखा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मामलों में बच्चों को ‘आतंकवादी’ या ‘भविष्य का आतंकवादी’ मानकर निशाना बनाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2023 से अक्टूबर 2025 के बीच करीब 58 हजार बच्चों ने अपने एक या दोनों माता-पिता को खो दिया। वहीं, कुपोषण के कारण 151 बच्चों की मौत हुई, जबकि एक हजार से अधिक बच्चों के अंग काटने पड़े।
रिपोर्ट में दर्ज आरोपों पर इजराइल की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज होने की संभावना जताई जा रही है।



