अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा शेषावतार मंदिर शिखर पर पूर्व निर्धारित ध्वजारोहण कार्यक्रम श्रद्धा व निष्ठा के साथ मंगलवार को सम्पन्न हुआ। शेषावतार मंदिर भगवान श्रीराम के अनुज लक्ष्मण जी को समर्पित है। इसके निर्माण के पूरा होते ही राम मंदिर परिसर में गणेश मंदिर, सूर्य देव मंदिर, माता अन्नपूर्णा मंदिर, हनुमान मंदिर, शिव मंदिर समेत सभी प्रमुख उप-मंदिरों का निर्माण और ध्वजा स्थापना कार्य संपन्न हो गया है। हालांकि मंदिर परिसर में ऑडिटोरियम, ट्रस्ट मुख्यालय और श्रद्धालु सुविधा केंद्र जैसे कुछ प्रशासनिक ढांचों का निर्माण अभी बाकी है, लेकिन धार्मिक दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
अयोध्या महानगर एवं ग्रामीण के लगभग 4 हजार रामभक्त कार्यक्रम के साक्षी बने। धर्मनगरी के पूज्य 11 संत चरणों ने अपने कर-कमलों से पूजित ध्वज मंदिर शिखर पर आरोहित किया। इस दौरान राजधानी लखनऊ में घटित हृदय विदारक अग्निकांड में मृतकों की आत्मा की सद्गति व घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रभु श्रीरामलला के श्री चरणों में प्रार्थना की गई। साथ ही दुखी परिवारीजनों, संबंधियों, मित्रों को धैर्य व साहस प्रदान करने की प्रभु से कामना की गई। कार्यक्रम के दौरान संग्रहालय के लिए राम से संबंधित प्राचीन पंडुलिपि भी सौंपी गई।
संतों ने ध्वज पूजन कर ध्वज आरोहित कराया

शेषावतार मंदिर शिखर पर पूज्य महंत शशिकान्त दास महाराज, पूज्य ज्ञानी गुरजीत सिंह, पूज्य महंत रामानंद दास महाराज, पूज्य जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य महाराज, पूज्य दिनेंन्द्र दास महाराज, पूज्य महंत रामकुमार दास महाराज, पूज्य रामानुजदास महाराज, पूज्य महंत रघुबीरशरण महाराज, पूज्य अधिकारी राजकुमार दास महाराज, पूज्य महंत गिरीश दास महाराज व महंत अवधेश दास शास्त्री महाराज ने शिष्यो के साथ ध्वज पूजन कर ध्वज आरोहित कराया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी रामभक्तों को समापन पर अल्पाहार व घर ले जाने के लिए प्रसाद का वितरण किया गया।
300 सौ साल पुरानी राम से संबंधित आध्यात्मिक ग्रंथ सौंपा

उपस्थित सभी भक्तों ने श्रीरामलला, श्रीराम परिवार मंदिरों के साथ परकोटा सहित अन्य मंदिरों के भी दर्शन पूजन किए। इस दौरान अयोध्या नगर के कुमारगंज निवासी जंगबहादुर सिंह ने लगभग 300 सौ साल पुरानी राम से संबंधित आध्यात्मिक ग्रंथ अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के लिए संत चरण के हाथों में सौंपी।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से महासचिव चम्पत राय, न्यासी अनिल मिश्र, गोपाल जी, रामशंकर, धनंजय पाठक, वीरेंद्र वर्मा, कारसेवकपुरम प्रभारी शिवदास सिंह जी, धीरेश्वर वर्मा, संजीब सिंह, आदित्य जी मौजूद रहे और व्यवस्था का कुशल संचालन किया।



