नई दिल्ली। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को राजनीतिक मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने से जुड़ा प्रस्ताव 50-48 मतों से पारित कर दिया है। इससे पहले प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे चुकी है।
रिपब्लिकन सांसदों का भी समर्थन
1973 के वॉर पॉवर्स एक्ट के बाद यह पहला अवसर है जब अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों ने किसी राष्ट्रपति से युद्ध जैसी सैन्य कार्रवाई समाप्त करने की मांग की है। मतदान के दौरान चार रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट सांसदों का समर्थन किया, जिससे ट्रम्प की पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए। हालांकि व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि इस प्रस्ताव का कोई कानूनी प्रभाव नहीं होगा। प्रशासन का कहना है कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई पहले ही समाप्त हो चुकी है और राष्ट्रपति के अधिकारों पर इस प्रस्ताव का असर नहीं पड़ेगा।
यूएई दौरे पर रूबियो
इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बहरीन और कुवैत के दौरे पर पहुंचे हैं। उनका उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर खाड़ी देशों की चिंताओं को दूर करना है। इन देशों को आशंका है कि किसी समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान का प्रभाव बढ़ सकता है। साथ ही, ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर समझौते में स्पष्ट शर्तें नहीं होने से भी सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच जारी वार्ता में ईरान के पुनर्निर्माण के लिए करीब 300 अरब डॉलर के संभावित फंड पर भी चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि इस फंड के लिए खाड़ी देशों से आर्थिक सहयोग मांगा जा सकता है। ऐसे में वॉशिंगटन अपने सहयोगी देशों का समर्थन जुटाने की कोशिशों में लगा हुआ है।



