नई दिल्ली: भारतीय कृषि और किसानों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में मोदी सरकार 3.0 ने एक और बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली के कृषि भवन में एक बेहद महत्वपूर्ण, उच्च स्तरीय साप्ताहिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
इस बैठक का एजेंडा पूरी तरह स्पष्ट था—खरीफ 2026 सीजन के लिए देशव्यापी तैयारियों को पुख्ता करना और किसी भी मौसमी चुनौती, विशेषकर अल नीनो (El Niño) के संभावित प्रभाव से किसानों को सुरक्षित रखना।
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हितों की रक्षा करना और उनकी आय बढ़ाना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मौसम चाहे जैसा भी हो, देश का किसान अकेला नहीं है।” — शिवराज सिंह चौहान
अल नीनो (El Niño) का सामना करने के लिए ‘कंटीन्जेंसी प्लान’ तैयार
इस साल कुछ हिस्सों में कम या असमान बारिश (अल नीनो की स्थिति) की आशंका को देखते हुए केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को ‘मिशन मोड’ में काम करने के निर्देश दिए हैं:
- 9-10 संवेदनशील राज्यों पर विशेष नजर: जिन राज्यों में अल नीनो का असर दिखने की संभावना है, वहां जिलाधिकारियों (DM), राज्य कृषि विभागों और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) के साथ मिलकर आपातकालीन बैठकें की जाएंगी।
- माइक्रो-लेवल प्लानिंग: कम बारिश वाले जिलों की पहचान कर ली गई है। इन क्षेत्रों के लिए राज्य सरकारों के समन्वय से विशेष फसल-वार contingency (आकस्मिक) योजनाएं बनाई जा रही हैं।
- जल और नमी संरक्षण: किसानों को पानी बचाने की तकनीकों, मल्चिंग (Mulching), इंटर-क्रॉपिंग (एक साथ दो फसलें उगाना) और वैकल्पिक फसल चक्र अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
- पॉजिटिव मैसेजिंग: सरकार का मानना है कि किसानों में डर फैलाने के बजाय, उन तक वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित एक शांत, भरोसेमंद और समाधान-उन्मुख संदेश पहुँचाया जाए।
दालों में ‘आत्मनिर्भरता’ और कपास के उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी का लक्ष्य
इस खरीफ सीजन में सरकार का ध्यान दो मुख्य नकदी और जरूरी फसलों पर केंद्रित है:
1. दलहन मिशन (Self-Reliance in Pulses)
भारत को दालों के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने और विदेशों से आयात पर निर्भरता खत्म करने के लिए अरहर (तुअर), उड़द और मूंग की खेती पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके तहत किसानों को:
- उच्च गुणवत्ता वाले उन्नत बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।
- तकनीकी मार्गदर्शन और सुनिश्चित बाजार मूल्य (MSP) का लाभ मिलेगा ताकि उनकी आय सुरक्षित रहे।
2. कपास उत्पादन में क्रांति (Cotton Production)
कपड़ा उद्योग की रीढ़ माने जाने वाले कपास की उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक तौर-तरीकों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है। सही किस्मों का चयन और वैज्ञानिक खेती के जरिए किसानों के मुनाफे को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।
खाद की उपलब्धता और मंडियों की लाइव मॉनिटरिंग
खेती के सीजन में किसानों को खाद या बीज के लिए लाइनों में न लगना पड़े, इसके लिए केंद्रीय मंत्री ने कड़े निर्देश दिए हैं:
- पर्याप्त स्टॉक: राष्ट्रीय स्तर पर उर्वरक (Fertilizer) का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। जैसे-जैसे मानसून आगे बढ़ेगा, जिलों और ब्लॉक स्तर पर इसकी सप्लाई और तेज कर दी जाएगी।
- एडवांस सप्लाई: यदि किसी छोटे स्तर (Micro-level) पर भी किल्लत की संभावना दिखती है, तो वहां पहले से ही बफर स्टॉक भेजने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, जलाशयों के पानी के स्तर और मंडियों के दामों पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।
‘लैब से लैंड’ तक पहुंचेगा वैज्ञानिक ज्ञान
बैठक में इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), कृषि विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिकों का ज्ञान केवल फाइलों तक सीमित न रहे।
- ग्राउंड-लेवल फीडबैक: तकनीक और सही सलाह समय पर सीधे किसान के खेत तक पहुंचनी चाहिए।
- इसके लिए कृषि चौपालों, मोबाइल ऐप्स और जमीनी अधिकारियों के जरिए किसानों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा जाएगा।
निष्कर्ष
खरीफ 2026 की यह समीक्षा बैठक दर्शाती है कि सरकार केवल नीतियां नहीं बना रही, बल्कि संकट आने से पहले ही उसका समाधान लेकर तैयार है। एडवांस प्लानिंग, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आत्मनिर्भरता के संकल्प के साथ भारतीय कृषि इस सीजन में एक नया मुकाम छूने के लिए तैयार है।



