नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शहरी परिवहन सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम ‘नमो भारत’ कॉरिडोर की सुरक्षा औपचारिक रूप से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को सौंप दी गई। न्यू अशोक नगर में आयोजित कार्यक्रम में इसकी घोषणा की गई, जो भारत के पहले हाई-स्पीड रीजनल ट्रांजिट सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआईएसएफ को सौंपी गई
इस अवसर पर सीआईएसएफ को पूरे ‘नमो भारत’ कॉरिडोर की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई। यह तैनाती एनसीआर के ट्रांजिट नेटवर्क में एकीकृत और तकनीक-आधारित सुरक्षा प्रणाली की शुरुआत का संकेत है।
प्रतीकात्मक चाबी सौंपकर हुआ औपचारिक हस्तांतरण
कार्यक्रम के दौरान एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक शलभ गोयल ने सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन को प्रतीकात्मक चाबी सौंपी। यह क्षण सुरक्षा व्यवस्था के औपचारिक हस्तांतरण का प्रतीक बना। कार्यक्रम की शुरुआत सीआईएसएफ महानिदेशक द्वारा जवानों के लिए बैचलर आवास के शिलान्यास के साथ हुई। यह कदम ड्यूटी पर तैनात जवानों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उन्नत सुरक्षा प्रणाली लागू होगी
सीआईएसएफ की तैनाती के बाद पूरे आरआरटीएस नेटवर्क में अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी, जिसमें—एडवांस्ड सर्विलांस सिस्टम, नियंत्रित, प्रवेश प्रणाली, तोड़फोड़ विरोधी जांच और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र शामिल होंगे, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और मजबूत होगी। प्रवीर रंजन ने कहा कि आरआरटीएस ‘नमो भारत’ नेटवर्क की सुरक्षा भारत के आधुनिक परिवहन ढांचे को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि बदलते परिवहन सिस्टम के साथ सुरक्षा को भी तकनीक आधारित और अधिक प्रभावी बनाना जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने न्यू अशोक नगर से आनंद विहार और सराय काले खां स्टेशनों तक यात्रा कर परिचालन और सुरक्षा तैयारियों का जायजा लिया।
दिल्ली मेट्रो मॉडल से जुड़ी सुरक्षा प्रणाली
सीआईएसएफ की तैनाती और पहले से विकसित मॉडल को दिल्ली मेट्रो प्रणाली के साथ जोड़कर पूरे ट्रांजिट नेटवर्क में समान सुरक्षा मानक लागू किए जाएंगे। इससे यात्रियों को एक समान और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था मिलेगी।
नमो भारत परियोजना का महत्व
‘नमो भारत’ परियोजना एनसीआरटीसी द्वारा आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के तहत लागू की जा रही है। यह हाई-स्पीड रीजनल कनेक्टिविटी परियोजना है, जिसकी ट्रेनों की गति 180 किमी/घंटा तक है और इसका उद्देश्य एनसीआर में यात्रा समय को काफी कम करना है। सीआईएसएफ की तैनाती के साथ ‘नमो भारत’ कॉरिडोर अब अधिक सुरक्षित, आधुनिक और तकनीक-आधारित परिवहन प्रणाली की ओर एक बड़ा कदम बन गया है, जिससे लाखों यात्रियों को लाभ मिलेगा।



