नयी दिल्ली: राजधानी के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) में आयोजित 39वां दीक्षांत समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवनभर सीखने, खुद को विकसित करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की निरंतर प्रक्रिया है। इस भव्य समारोह में देशभर के 32 लाख से अधिक छात्रों को डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। समारोह में दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, कुलपति प्रो. उमा कांजीलाल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। वहीं, विभिन्न राज्यों के राज्यपाल और अन्य नेता वर्चुअल माध्यम से इस कार्यक्रम में जुड़े।
रिकॉर्ड स्तर पर डिग्री वितरण
इस दीक्षांत समारोह में 32 लाख से अधिक छात्रों को डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए, जो इग्नू की व्यापक पहुंच और उसकी शैक्षिक क्षमता को दर्शाता है। इतनी बड़ी संख्या यह बताती है कि इग्नू देश के सबसे बड़े शिक्षा प्लेटफॉर्म्स में से एक बन चुका है।
इग्नू: समावेशी और सुलभ शिक्षा का स्तंभ
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह संस्थान भारत की खुली और दूरस्थ शिक्षा प्रणाली का मजबूत स्तंभ है। उन्होंने बताया कि यहां 14 लाख से अधिक छात्र अध्ययन कर रहे हैं, जिनमें 56% महिलाएं और 58% छात्र ग्रामीण व वंचित समुदायों से हैं। यह आंकड़े शिक्षा में समानता और पहुंच को मजबूत करते हैं।
“कई देशों की आबादी से ज्यादा छात्र”
उन्होंने कहा कि इग्नू के छात्रों की संख्या कई देशों की कुल आबादी से भी अधिक है, जो इसके व्यापक प्रभाव और शिक्षा के लोकतंत्रीकरण में इसकी भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए कहा कि इग्नू ने अपने मजबूत दूरस्थ शिक्षा मॉडल के चलते पढ़ाई को बाधित नहीं होने दिया। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से शिक्षा को निर्बाध जारी रखा गया, जिससे यह तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनकर उभरा।
नई शिक्षा नीति से बढ़ा लचीलापन
उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत इग्नू द्वारा लागू चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम और मल्टीपल एग्जिट विकल्पों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों को अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ाई करने और बीच में भी प्रमाण-पत्र लेने का विकल्प मिला है।
AI और नई तकनीकों को अपनाने की अपील
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकें शिक्षा को और बेहतर बना सकती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कंप्यूटर आने पर लोगों को डर था कि नौकरियां खत्म हो जाएंगी, लेकिन इसके उलट रोजगार के नए अवसर पैदा हुए वैसे ही AI को भी अवसर के रूप में देखना चाहिए।
नैतिक मूल्यों के साथ ही हो विकास
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आधुनिक विकास को भारतीय परंपराओं के अनुरूप होना चाहिए। वैज्ञानिक प्रगति तभी सार्थक होगी, जब वह नैतिक मूल्यों के मार्गदर्शन में हो। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यदि सभी लोग मिलकर प्रयास करें, तो 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से इसमें सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
डिजिटल पहल और नई शुरुआत
इस अवसर पर डिजिलॉकर के माध्यम से छात्रों को प्रमाण पत्र जारी किए गए। साथ ही, इग्नू के एलुमनाई पोर्टल का शुभारंभ किया गया, जिसमें 50 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं। इग्नू का 39वां दीक्षांत समारोह न केवल लाखों छात्रों की उपलब्धि का जश्न था, बल्कि यह संदेश भी देता है कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत नींव है।



