पटना: बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा है कि रासायनिक कीटनाशकों का अनियंत्रित और अंधाधुंध उपयोग अब एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है, जो न केवल फसलों की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है, बल्कि मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा उत्पन्न कर रहा है।
मंत्री ने किसानों को सलाह देते हुए कहा कि कीटनाशकों का उपयोग केवल निर्धारित और अनुशंसित मात्रा में ही किया जाए, क्योंकि अधिक मात्रा में उपयोग से खाद्य पदार्थों में हानिकारक अवशेष (रेजिड्यू) बढ़ जाते हैं, जो आगे चलकर कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इन अवशेषों का प्रभाव केवल मानव स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पशु-आधारित खाद्य उत्पादों जैसे दूध, दही और मांस की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है।
उन्होंने बताया कि कीटनाशी अवशेष युक्त खाद्य पदार्थ न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, बल्कि यह पर्यावरण को भी प्रदूषित कर रहे हैं, जिससे कृषि प्रणाली पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
कृषि मंत्री ने किसानों को सलाह दी कि वे सुरक्षित और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाएं, जैसे फसल चक्र का पालन, प्रतिरोधी किस्मों का चयन, तथा कीटों के प्राकृतिक शत्रुओं का संरक्षण। उन्होंने एकीकृत कीट-व्याधि प्रबंधन (Integrated Pest Management) को अपनाने पर विशेष जोर दिया और फेरोमोन ट्रैप, लाइट ट्रैप तथा अवरोधक फसलों जैसे वैज्ञानिक उपायों के उपयोग की भी सिफारिश की।
उन्होंने यह भी कहा कि रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर जैविक विकल्प जैसे नीम तेल, फफूंदनाशी और जीवाणुनाशी का उपयोग किया जाना चाहिए, क्योंकि ये पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए अधिक सुरक्षित हैं। साथ ही उन्होंने किसानों से अपील की कि अत्यधिक विषैले रासायनिक कीटनाशकों के बजाय सुरक्षित विकल्पों का चयन करें और रासायनिक दवाओं का उपयोग केवल अंतिम विकल्प के रूप में ही करें।
अंत में मंत्री ने कहा कि यदि किसान सुरक्षित, संतुलित और टिकाऊ खेती की ओर बढ़ते हैं तो न केवल उनकी उपज की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि समाज भी अधिक स्वस्थ और सुरक्षित बन सकेगा।



