नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने रक्षा निर्यात के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 38,424 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड स्तर छू लिया है। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष के 23,622 करोड़ रुपये की तुलना में 62.66 प्रतिशत अधिक है, जो देश के रक्षा उत्पादन और निर्यात क्षमता में तेज़ी से हो रही वृद्धि को दर्शाता है।
वैश्विक रक्षा विनिर्माण हब बनने की ओर बढ़ता भारत
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि भारत तेजी से वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में हो रहे बदलावों को इस सफलता का आधार बताया।
डीपीएसयू का दमदार प्रदर्शन, निजी क्षेत्र भी पीछे नहीं
आंकड़ों के अनुसार, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSU) के निर्यात में 151 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। डीपीएसयू का योगदान 21,071 करोड़ रुपये रहा, जबकि निजी क्षेत्र ने 17,353 करोड़ रुपये के साथ 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।
यह दर्शाता है कि अब रक्षा निर्यात में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की साझेदारी मजबूत हो रही है।
Under the inspiring leadership of PM Shri @narendramodi, India is scripting an impressive defence exports success story!
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) April 2, 2026
India defence exports have touched a new all time high with a record ₹38,424 crore in FY 2025-26. It marks a robust 62.66% growth over the previous fiscal.… pic.twitter.com/eAAh1PYX7e
पांच साल में तीन गुना वृद्धि, बढ़ी वैश्विक स्वीकार्यता
पिछले पांच वर्षों में भारत का रक्षा निर्यात लगभग तीन गुना बढ़ा है। यह भारतीय रक्षा उत्पादों की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में देश की मजबूत होती स्थिति को दर्शाता है।
80 से ज्यादा देशों तक पहुंच, निर्यातकों की संख्या भी बढ़ी
भारत अब 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। वहीं, निर्यातकों की संख्या भी बढ़कर 145 हो गई है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 13.3 प्रतिशत अधिक है।
यह आंकड़े भारत के रक्षा उद्योग के तेजी से विस्तार और वैश्विक बाजार में बढ़ती हिस्सेदारी को दर्शाते हैं।
सरकारी नीतियों और सुधारों का मिला फायदा
सरकार द्वारा व्यापार सुगमता बढ़ाने और प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। रक्षा निर्यात के लिए नए ऑनलाइन पोर्टल और सरलीकृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की गई है, जिससे निर्यातकों को काफी सुविधा मिली है।
निष्कर्ष: आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की ओर बड़ा कदम
रक्षा निर्यात में यह रिकॉर्ड वृद्धि न केवल भारत की आर्थिक ताकत को मजबूत करती है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी आगे बढ़ाती है। आने वाले वर्षों में भारत के वैश्विक रक्षा बाजार में और मजबूत स्थान बनाने की उम्मीद है।



