पश्चिम बंगाल: बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। 30 मार्च 2026 को भारतीय जनता पार्टी के नंदीग्राम, हल्दिया और महिषादल विधानसभा क्षेत्रों के प्रत्याशियों ने हल्दिया एसडीओ कार्यालय में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।
नंदीग्राम से शुभेंदु अधिकारी
नंदीग्राम (विधानसभा क्षेत्र संख्या 210) से भाजपा प्रत्याशी एवं वर्तमान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने नामांकन दाखिल किया। नामांकन से पहले उन्होंने नंदीग्राम के रेयापाड़ा स्थित शिव मंदिर में पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद लेकर आगे की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की। उनके नामांकन को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल देखने को मिला और बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे।
हल्दिया से प्रदीप कुमार बिजौली तथा महिषादल से सुभाष पंजा
हल्दिया (विधानसभा क्षेत्र संख्या 209) से भाजपा उम्मीदवार प्रदीप कुमार बिजौली तथा महिषादल (विधानसभा क्षेत्र संख्या 208) से सुभाष पंजा ने भी आज औपचारिक रूप से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। तीनों प्रत्याशियों के नामांकन को पार्टी ने एक संयुक्त राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे क्षेत्र में चुनावी सरगर्मी और तेज हो गई।

नामांकन के मौके पर आयोजित रोडशो और रैली में हजारों की संख्या में कार्यकर्ता, समर्थक और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। सड़कों पर भाजपा समर्थकों की भारी भीड़ और नारों के बीच पूरा माहौल चुनावी रंग में रंग गया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी मौजूद
इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, पश्चिम बंगाल भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद दिलीप घोष सहित कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। नेताओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक राजनीतिक महत्व प्रदान किया।
रोडशो के दौरान विभिन्न स्थानों पर प्रत्याशियों का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया और कार्यकर्ताओं ने पार्टी के पक्ष में जोरदार नारेबाजी की। इससे साफ संकेत मिला कि भाजपा इन तीनों विधानसभा क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

आगे क्या होगा चुनाव में?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नंदीग्राम और आसपास के क्षेत्रों में इस तरह के बड़े पैमाने पर नामांकन और रोडशो आने वाले चुनावी मुकाबले को और अधिक दिलचस्प बना सकते हैं।
कुल मिलाकर, आज का यह नामांकन कार्यक्रम केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं रहा, बल्कि एक बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में सामने आया, जिसने पश्चिम बंगाल की चुनावी सरगर्मी को और बढ़ा दिया है।



