नई दिल्ली। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ताज़ा रिपोर्ट ने देश के राजनीतिक दलों की आर्थिक सेहत का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है। वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में 161% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस रेस में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबसे आगे रही है। बीजेपी को मिला चंदा अन्य सभी राष्ट्रीय दलों को मिले कुल चंदे के योग से भी 10 गुना ज्यादा है।
बीजेपी और कांग्रेस के आंकड़ों में जमीन-आसमान का अंतर
रिपोर्ट के अनुसार, ₹20,000 से अधिक के कुल चंदे की राशि ₹6,648.563 करोड़ रही। इसमें से अकेले बीजेपी को ₹6,074.015 करोड़ (5,522 दान) मिले हैं। वहीं, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ₹517.394 करोड़ (2,501 दान) के साथ दूसरे नंबर पर रही। बीजेपी का चंदा पिछले साल के मुकाबले 171% बढ़ा है, जबकि कांग्रेस के चंदे में 84% की वृद्धि हुई है।
कॉर्पोरेट जगत की पहली पसंद बनी भाजपा
राजनीतिक चंदे का सबसे बड़ा स्रोत कॉर्पोरेट कंपनियां रहीं। कुल चंदे का 92.18% हिस्सा (₹6,128.787 करोड़) कंपनियों से आया है। बीजेपी ने कंपनियों से ₹5,717.167 करोड़ मिले, जो अन्य दलों के कुल कॉर्पोरेट चंदे से 13 गुना अधिक है। कांग्रेस ने कंपनियों से ₹383.86 करोड़ और व्यक्तिगत दान से ₹132.39 करोड़ जुटाए। आम आदमी पार्टी के चंदे में 244% और NPEP में 1,313% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है।
बसपा का ‘जीरो’ चंदा बरकरार
हैरानी की बात यह है कि मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने एक बार फिर घोषित किया है कि उन्हें ₹20,000 से ज्यादा का कोई चंदा नहीं मिला। बसपा पिछले 19 सालों से लगातार यही दावा करती आ रही है।



