नई दिल्ली। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारत ने अपनी धाक जमा ली है। ‘क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग बाई सब्जेक्ट 2026’ के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारतीय संस्थानों ने लंदन और न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों को कड़ी टक्कर दी है। इस वर्ष भारत के 12 संस्थानों ने विभिन्न विषयों में टॉप-50 में कुल 27 स्थान हासिल किए हैं, जो साल 2024 की तुलना में दोगुने से भी अधिक हैं। भारत की रैंकिंग सुधार दर (44%) दुनिया की किसी भी बड़ी शिक्षा प्रणाली के मुकाबले सबसे तेज दर्ज की गई है।
आईआईटी दिल्ली बना इंजीनियरिंग का नया ग्लोबल हब
इस साल ‘भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान’ दिल्ली देश का सबसे शानदार प्रदर्शन करने वाला संस्थान बनकर उभरा है। आईआईटी दिल्ली के पांच कोर इंजीनियरिंग विषय इलेक्ट्रिकल (36वीं रैंक), मैकेनिकल (44वीं), कंप्यूटर साइंस (45वीं), केमिकल (48वीं) और सिविल इंजीनियरिंग (50वीं) दुनिया के टॉप-50 में शामिल हो गए हैं। इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी कैटेगरी में संस्थान ने वैश्विक स्तर पर 36वां स्थान प्राप्त किया है। वहीं, आईआईटी बॉम्बे ने मिनरल और माइनिंग इंजीनियरिंग में दुनिया में 36वीं रैंक हासिल की है।
आईआईएम अहमदाबाद का ऐतिहासिक प्रदर्शन
मैनेजमेंट शिक्षा के क्षेत्र में भारत ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। आईआईएम अहमदाबाद ने ‘मार्केटिंग’ जैसे आधुनिक विषय में ग्लोबल लेवल पर 21वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया है। यह पहली बार है जब कोई भारतीय संस्थान इस विषय में इतनी ऊंची रैंक पर पहुंचा है। इसके अलावा ‘बिजनेस और मैनेजमेंट स्टडीज’ में भी इसे 21वां स्थान मिला है। आईआईएम बेंगलुरु (29वीं) और आईआईएम कोलकाता (47वीं) ने भी टॉप-50 में अपनी जगह सुरक्षित रखी है।
जेनयू और एम्स की ऊंची उड़ान
इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के इतर अन्य क्षेत्रों में भी भारतीय संस्थानों ने बेहतर प्रदर्शन किया है:
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने ‘डेवलपमेंट स्टडीज’ में दुनिया में अपनी 26वीं रैंक बरकरार रखी है। बिट्स पिलानी ने फार्मेसी और फार्माकोलॉजी में लंबी छलांग लगाते हुए 45वां स्थान हासिल किया। एम्स दिल्ली ने मेडिसिन के क्षेत्र में सुधार करते हुए वैश्विक स्तर पर 105वीं रैंक प्राप्त की, जो किसी भी भारतीय मेडिकल कॉलेज के लिए अब तक की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग में से एक है।



