नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को दिल्ली स्थित उसके ऐतिहासिक मुख्यालय, 24 अकबर रोड को 28 मार्च तक खाली करने का कड़ा निर्देश दिया है।
संपदा विभाग द्वारा जारी इस नोटिस ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है, क्योंकि यह बंगला पिछले 48 वर्षों से कांग्रेस की गतिविधियों का मुख्य केंद्र रहा है। हालांकि पार्टी ने पिछले साल अपना कामकाज नए मुख्यालय ‘इंद्रा भवन’ (कोटला मार्ग) में स्थानांतरित कर दिया था, लेकिन अकबर रोड से उसका परिचालन अभी भी जारी है।
24 अकबर रोड का यह बंगला न केवल कांग्रेस का कार्यालय रहा है, बल्कि भारतीय राजनीति के कई ऐतिहासिक मोड़ों का गवाह भी रहा है। 1977 की चुनावी हार के बाद, इंदिरा गांधी ने इसी बंगले को अपनी राजनीति का आधार बनाया था। राजीव गांधी, पी. वी. नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान भी यह स्थान पार्टी का शक्ति केंद्र बना रहा। इस आदेश में 5 रायसीना रोड स्थित भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यालय को भी खाली करने के निर्देश शामिल हैं।
कांग्रेस पार्टी इस बेदखली के आदेश को चुनौती देने के लिए कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। पार्टी के दिग्गजों का इस स्थान से गहरा भावनात्मक जुड़ाव है, जिसके कारण इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच बड़ा राजनीतिक टकराव होने की संभावना है। आजादी से पहले यह संपत्ति वायसराय की कार्यकारी परिषद के सर रेजिनाल्ड मैक्सवेल का निवास थी और 1960 के दशक में म्यांमार की राजदूत डॉ खिन क्यी भी यहाँ रही थीं।
जैसे-जैसे 28 मार्च की समयसीमा नजदीक आ रही है, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस कानूनी दांव-पेच के जरिए इस प्रक्रिया को रोक पाती है या उसे अपनी आधी सदी पुरानी यादों को समेटकर नए पते पर पूरी तरह शिफ्ट होना पड़ेगा।



