राजस्थान के अजमेर में एक ऐसा सफेद क्षेत्र अब सोशल मीडिया पर छाया हुआ है जिसे लोग ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कह रहे हैं। यहाँ के लोकल लोग और पर्यटक दोनों ही इस जगह पर सेल्फी लेने और वीडियो बनाने के लिए पहुंच रहे हैं।
लेकिन इस तस्वीर की सुंदरता के पीछे छिपा है एक खतरनाक सच: यह ‘बर्फ’ असल में मार्बल स्लरी का अपशिष्ट है।
मार्बल स्लरी क्या है और कैसे बनती है यह जगह
मार्बल की कटाई और पॉलिशिंग के दौरान पानी और पत्थर के सूक्ष्म कणों का मिश्रण तैयार होता है, जिसे स्लरी कहा जाता है। जब यह स्लरी सूख जाती है, तो यह सफेद पाउडर जैसी बन जाती है, जो दूर से बर्फ की तरह दिखती है। यही कारण है कि अजमेर का यह स्थान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
खतरनाक क्रिस्टलाइन सिलिका: एक अदृश्य दुश्मन
अक्सर पर्यटक नहीं जानते कि इस मार्बल डस्ट में रेस्पिरेबल क्रिस्टलाइन सिलिका हो सकती है। यह सूक्ष्म धूल सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकती है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है।
- सिलिका के लगातार संपर्क में आने से सिलिकोसिस जैसी incurable फेफड़ों की बीमारी हो सकती है।
- इससे सांस लेने में कठिनाई, लगातार खाँसी, और फेफड़ों की क्षमता में कमी हो सकती है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रेस्पिरेबल क्रिस्टलाइन सिलिका को Group 1 human carcinogen यानी मानव कैंसरजन के रूप में वर्गीकृत किया है।
हालांकि पर्यटक केवल थोड़े समय के लिए आते हैं, लेकिन हवा या गतिविधियों से यह धूल फैल सकती है और सांस के जरिए शरीर में जा सकती है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य पर असर
राजस्थान मार्बल उत्पादन के लिए जाना जाता है, लेकिन स्लरी का गलत तरीके से निपटान ना केवल वायु को प्रदूषित करता है बल्कि मिट्टी और जल स्रोतों को भी प्रभावित करता है।
अजमेर का यह ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ न केवल एक सुंदर जगह की तरह दिखता है, बल्कि यह औद्योगिक अपशिष्ट और स्वास्थ्य जोखिमों का एक चेतावनी संकेत भी है।



