नई दिल्ली | भारतीय संस्कृति की सदियों पुरानी और जीवंत कला ‘कठपुतली’ को वैश्विक पहचान देने के लिए डाक विभाग ने एक अनूठी पहल की है। नई दिल्ली स्थित इंडियन हैबिटेट सेंटर में आयोजित एक गरिमामय समारोह में डाक सचिव वंदिता कौल ने “भारत की कठपुतलियां” विषय पर आठ स्मारक डाक टिकटों का एक विशेष सेट जारी किया।
सांस्कृतिक विरासत के ‘लघु दूत’
विमोचन के अवसर पर डाक सचिव ने डाक टिकटों को राष्ट्र की विरासत का ‘लघु दूत’ बताया। उन्होंने कहा कि ये टिकट उन अमर कहानीकारों और कलाकारों को समर्पित हैं, जिन्होंने पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमारी लोककथाओं और सामाजिक मूल्यों को सुरक्षित रखा है। यह पहल न केवल कला प्रेमियों को आकर्षित करेगी, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
इन आठ कला रूपों को मिला स्थान
इस विशेष सेट में भारत के विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट कठपुतली शैलियों को दर्शाया गया है:
- कठपुतली (राजस्थान): धागे वाली विश्व प्रसिद्ध कठपुतली।
- यक्षगान सूत्रदा गोम्बेयट्टा (कर्नाटक): दक्षिण भारतीय शास्त्रीय कला शैली।
- डांगर पुतुल (पश्चिम बंगाल): पारंपरिक छड़ी वाली कठपुतली।
- काठी कुंडई (ओडिशा): उड़ीसा की पारंपरिक कला।
- बेनीर पुतुल (पश्चिम बंगाल): दस्ताने वाली कठपुतली।
- पावकथकली (केरल): कथकली नृत्य शैली पर आधारित।
- रावणछाया (ओडिशा): छाया कठपुतली (Shadow Puppet)।
- टोलू बोम्मलट्टा (आंध्र प्रदेश): विशाल और रंगीन छाया कठपुतलियां।
कलात्मक डिजाइन और उपलब्धता
इन टिकटों और प्रथम दिवस कवर का शानदार डिजाइन शंखा सामंता द्वारा तैयार किया गया है। इसमें संगीत नाटक अकादमी और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र का विशेष सहयोग रहा है।
- मूल्य: प्रत्येक डाक टिकट का मूल्य 500 पैसा (5 रुपये) है।
- कहाँ उपलब्ध: ये टिकट देश भर के डाक टिकट ब्यूरो और आधिकारिक वेबसाइट
www.epostoffice.gov.inपर बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।



