नई दिल्ली | भारत ने अपनी तकनीकी संप्रभुता की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है। देश की अग्रणी सॉवरेन क्लाउड प्रदाता कंपनी योटा डेटा सर्विसेज और डिजिटल इंडिया के भाषिनी डिवीजन ने हाथ मिलाते हुए भाषिनी के संपूर्ण एआई स्टैक को स्वदेशी शक्ति क्लाउड पर सफलतापूर्वक तैनात कर दिया है।
यह कदम न केवल ‘इंडियाएआई मिशन’ के उद्देश्यों को पूरा करता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि भारत का भाषाई डेटा और एआई मॉडल देश की सीमाओं और अधिकार क्षेत्र के भीतर ही सुरक्षित रहें।
महाकुंभ 2025 में हुआ सफल परीक्षण
इस सॉवरेन एआई क्लाउड की क्षमता का असली प्रमाण महाकुंभ 2025 में देखने को मिला। योटा के एनवीडिया एच 100-सक्षम शक्ति क्लाउड द्वारा संचालित भाषिनी प्लेटफॉर्म ने लाखों श्रद्धालुओं को 11 से अधिक भारतीय भाषाओं में रीयल-टाइम अनुवाद और ध्वनि-आधारित सहायता प्रदान की।
बहुभाषी सहायक ‘कुंभ सह’एआई’यक’ ने भारी जनसमूह के बीच रीयल-टाइम संचार को सुलभ बनाकर इस तकनीक की विश्वसनीयता सिद्ध की।
प्रदर्शन में सुधार और लागत में भारी बचत
विदेशी हाइपरस्केलर से स्वदेशी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर जाने के परिणाम चौंकाने वाले रहे हैं:
कार्यक्षमता: प्रदर्शन में 40 प्रतिशत तक का सुधार दर्ज किया गया।
बचत: परिचालन लागत में 20 से 30 प्रतिशत की कमी आई।
विश्वसनीयता: शून्य डेटा हानि के साथ 99.99 प्रतिशत निरंतर अपटाइम सुनिश्चित किया गया। यह माइग्रेशन मात्र 3 महीनों के भीतर पूरा किया गया, जिसमें 200 टीआईबी डेटा और 3.5 बिलियन से अधिक फाइलों को बिना किसी नुकसान के स्थानांतरित किया गया।
आत्मनिर्भर भारत का नया खाका
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव, अभिषेक सिंह ने कहा कि यह स्थानांतरण दर्शाता है कि भारत सार्वजनिक हित के लिए अपने सॉवरेन एआई सिस्टम को सुरक्षित रूप से विकसित और विस्तारित कर सकता है।
वहीं, योटा के सीईओ सुनील गुप्ता ने इसे भारत की डेटा यात्रा का एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया, जो दर्शाता है कि मिशन-क्रिटिकल एआई प्लेटफॉर्म को पूरी तरह स्वदेशी बुनियादी ढांचे पर संचालित किया जा सकता है।
क्या है ‘भाषिनी’ और ‘शक्ति क्लाउड’?
भाषिनी: एआई-संचालित भाषा अनुवाद मंच जो साक्षरता और डिजिटल असमानता को दूर कर भारतीय भाषाओं के बीच संचार को सुलभ बनाता है।
शक्ति क्लाउड: योटा द्वारा निर्मित स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जो उच्च क्षमता वाले जीपीयू के माध्यम से एआई गणनाओं को गति देता है।



